Monday, August 28, 2017

chanchal: chanchal: चिखुरी चिचिआने / चंचलजब पाखण्ड के आतंक स...चिखुरी चिचियाने / चंचल अंदर बलात्कार होता रहा ,हम राम धुन गाते रहे ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ हम दुनिया के सामने , तीसरी बार नंगा हो रहे हैं . ३० जनवरी १९४८ , जब हमने एक निहत्थे फ़कीर को सरे आम उस समय गोली मार कर ह्त्या कट दी , जब वह राम धुन के साथ लोंगो को सद्भाव से रहने की अपील करने जा रहा था . किस जाहिल सोच ने गोली चलाई थी ? जवाब सब को मालूम है , सारी दुनिया जानती है वह छद्म 'हिन्दू ' सोच . गौर करिए उस अंग्रेज महिला के जवाब को जो उसने एक भातरीय को दिया था . भारतीय नौजवान अपने देश की तारीफ़ में बोल रहा था- हम कितने महान हैं जिस धरती पर बुद्ध और गांधी पौदा हुए हैं . अंग्रेज महिला ने पलटकर पूछा था - इसीलिये तुम महान हो किएक निहत्थे फ़कीर को गोलियों से छलनी कर डाले ? इसका जवाब हम आज तक नही दे पाए हैं . हमे सारी दुनिया के सामने किस सोच ने शर्मिंदा होने को मजबूर किया है ? यह सवाल जब तक नही दे पाओगे , तब तक मेहरबानी करके राष्ट्रप्रेम की बात मत करो लोग तुम पर हँसेंगे . बापू की ह्त्या पर वायसराय की टिप्पणी थी - अगर यह महात्मा गुलाम भारत में मरता तो अंग्रेज अपने उपर लगे कलंक को कभी नही मिटा पाते .एक अन्ग्रेज्की सोच थी और एक ये हिन्दू की सोच ? दूसरी बार हम शर्मिन्दा हुए ६ दिसम्बर १९९२ को जब अयोध्या में बारी मस्जिद गिरा दी गयी .अब तक हम सारी दुनिया में दो बातों के लिए इज्जत पाते थे , एक -हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और दुसरा सबसे बड़ा तर्क की हम दुनिया में सबसे बड़े सद्भावी देश हैं हना हे एक को अपने अपने मजहब में में जीने की खुली आजादी है .६ दिसम्बर ९२ कोक्या हुआ ? एक धर्म की आड़ में कुल डेढ़ लाख की भीड़ अयोध्या में जुटी और उसने दुसरे धर्म के इबादत गाह पर हमला करके उसे ध्वस्त कर दिया .और दुनिया में यह दर्ज हो गया की भारत एक धर्म विशेष का मुल्क है जहां एनी धर्मों को सलीके से जीने की सुविधा नही है . हम इर शर्मिन्दा हुए और किस सोच ने हमे शर्मिन्दा किया ? अगली नस्ल इसका जवाब खोजेगी लेकिन कमबख्त यह पीढ़ी तो नाकारा साबित ही हुयी , किसने हमे सोच के आधार पर बधिया किया है ? तीसरी बार पंचकुला ने हमे लबे सडक नंगा कर दिया और हम बेबस होकर इधर उधर झाँक रहे हैं . बलात्कार एक बीमारी है कुछ शीत देशों को छोड़ दिया जाय तो यह बीमारी कमोबेश हर मुल्क में है , हर मुल्क के पास इसका इलाज भी है , बीमार को सजा मिलती है बगैर किसी भेद भाव के . रंग . नस्ल. धन. वोह्दा , रूतबा नके यहाँ कोइ मायने नही रखता , न्याय सब केलिए बराबर है . लेकिन कल पंचकुला की घटना ने हमे नये सिरे से शर्मिन्दा किया है . जब शबे की सरकार और खुद केंद्र की सरकार चाँद वोटो केलिए अपने जमीर का ही सौदा कर ले , यह कल उघार हो गया जब बलात्कार का अपराधी जगमीत न्यायालय में अप्राधिघोषित हुआ तो पहली बार जगमीत राम र हीम को लगा की कल तक हम जिन अबोध भोली भाली जनता को छल कर उसे लूट रहे थे , उसका तन, मन और धन आज वो खुद लुट गया है ,जिसने उससे वायदा किया था . इन अपराधों से मुक्त कराने के लिए वे खुद जनता की अदालत में अपराधी बने खड़े हैं .कल हरियाणा और केंद्र का नेतृत्व बिलकुल नंगा हो गया जब जगमीत की बेटी ने खुले आम यह रहस्य खोल दिया की भाजपा और पापा से जो डील हुआ था की तुम हमे वोट दो हम तुम्हे बलात्कार समेत जितने भी जुर्म हैं उनसे बरी करा देंगे .यह दुनिया की पहली बदचलन सरकार है जो काठ की कुर्सी के लिए तमाम जरायम पेशे को अख्तियार किये बैठी है और एक धर्म की आड़ में दुहाई देगी हिन्दू होने की . हिन्दू सभ्यता का सबसे बड़ा कातिल अगर कोइ है तो वो ये ही हैं . अभी और लिखते लेकिन चिखुरी उठ गये , मद्दू पत्रकार एक नई खबर लाये है . आश्रम में दोलाख की एक गाडी अभी जला दी गयी है

chanchal: chanchal: चिखुरी चिचिआने / चंचलजब पाखण्ड के आतंक स...: chanchal: चिखुरी चिचिआने / चंचल जब पाखण्ड के आतंक से समाज न ... : चिखुरी चिचिआने / चंचल जब पाखण्ड के आतंक से समाज न  जूझ पाए ------------...चिखुरी चिचियाने / चंचल

 अंदर बलात्कार होता रहा ,हम राम धुन गाते रहे

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हम दुनिया के सामने , तीसरी बार नंगा हो रहे हैं .

३० जनवरी १९४८ , जब हमने एक निहत्थे फ़कीर को सरे आम उस समय गोली मार कर  ह्त्या कट दी , जब वह राम धुन के साथ लोंगो को सद्भाव से रहने की अपील करने जा रहा था .

किस जाहिल सोच ने गोली चलाई थी ?

जवाब सब को मालूम है , सारी दुनिया जानती है वह छद्म 'हिन्दू ' सोच . गौर करिए उस अंग्रेज महिला के जवाब को जो उसने एक भातरीय को दिया था . भारतीय नौजवान अपने देश की तारीफ़ में बोल रहा था- हम कितने महान हैं जिस धरती पर बुद्ध और गांधी  पौदा हुए हैं . अंग्रेज महिला ने पलटकर पूछा था - इसीलिये तुम महान हो किएक निहत्थे फ़कीर को गोलियों से छलनी कर डाले ? इसका जवाब हम आज तक नही दे पाए हैं . हमे सारी दुनिया के सामने किस सोच ने शर्मिंदा होने को मजबूर किया है ? यह सवाल जब तक नही दे पाओगे , तब तक मेहरबानी करके राष्ट्रप्रेम की बात मत करो लोग तुम पर हँसेंगे . बापू की ह्त्या पर वायसराय की टिप्पणी थी - अगर यह महात्मा गुलाम भारत में मरता तो अंग्रेज अपने उपर लगे कलंक को कभी नही मिटा पाते .एक अन्ग्रेज्की सोच थी और एक ये हिन्दू की सोच ?

दूसरी बार हम शर्मिन्दा हुए ६ दिसम्बर १९९२ को जब अयोध्या में बारी मस्जिद गिरा दी गयी .अब तक हम सारी  दुनिया में दो बातों के लिए इज्जत पाते थे , एक -हम दुनिया के सबसे बड़े

लोकतंत्र हैं और दुसरा सबसे बड़ा तर्क की हम दुनिया में सबसे बड़े सद्भावी देश हैं हना हे एक को अपने अपने मजहब में में जीने की खुली आजादी है .६ दिसम्बर ९२ कोक्या हुआ ? एक धर्म की आड़ में कुल डेढ़ लाख की भीड़ अयोध्या में जुटी और उसने दुसरे धर्म के इबादत गाह पर हमला करके उसे ध्वस्त कर दिया .और दुनिया में यह दर्ज हो गया की भारत एक धर्म विशेष का मुल्क है जहां एनी धर्मों को सलीके से जीने की सुविधा नही है . हम इर शर्मिन्दा हुए और किस सोच ने हमे शर्मिन्दा किया ? अगली नस्ल इसका जवाब खोजेगी लेकिन कमबख्त यह पीढ़ी तो नाकारा साबित ही हुयी , किसने हमे सोच के आधार पर बधिया किया है ?

तीसरी बार पंचकुला ने हमे लबे सडक नंगा कर दिया और हम बेबस होकर इधर उधर झाँक रहे हैं . बलात्कार एक बीमारी है कुछ शीत देशों को छोड़ दिया जाय तो यह बीमारी कमोबेश हर मुल्क में है , हर मुल्क के पास इसका इलाज भी है , बीमार को सजा मिलती है बगैर किसी भेद भाव के . रंग . नस्ल. धन. वोह्दा , रूतबा नके यहाँ कोइ मायने नही रखता , न्याय सब केलिए बराबर है . लेकिन कल पंचकुला की घटना ने हमे नये सिरे से शर्मिन्दा किया है . जब शबे की सरकार और खुद केंद्र की सरकार चाँद वोटो केलिए अपने जमीर का ही सौदा कर ले , यह कल उघार हो गया जब बलात्कार का अपराधी जगमीत न्यायालय में अप्राधिघोषित हुआ तो पहली बार जगमीत राम र हीम को लगा की कल तक हम जिन अबोध भोली भाली जनता को छल कर उसे लूट रहे थे , उसका तन, मन और धन आज वो खुद लुट गया है ,जिसने उससे वायदा किया था . इन अपराधों से मुक्त कराने के लिए वे खुद जनता की अदालत में अपराधी बने खड़े हैं .कल हरियाणा और केंद्र का नेतृत्व बिलकुल नंगा हो गया जब जगमीत की बेटी ने खुले आम यह रहस्य खोल दिया की भाजपा और पापा से जो डील हुआ था की तुम हमे वोट दो हम तुम्हे बलात्कार समेत जितने भी जुर्म हैं उनसे बरी करा देंगे .यह दुनिया की पहली बदचलन सरकार है जो काठ की कुर्सी के लिए तमाम जरायम पेशे को अख्तियार किये बैठी है और एक धर्म की आड़ में दुहाई देगी हिन्दू होने की .

हिन्दू सभ्यता का सबसे बड़ा कातिल अगर कोइ है तो वो ये ही हैं .

अभी और लिखते लेकिन चिखुरी उठ गये , मद्दू पत्रकार एक नई खबर लाये है . आश्रम में दोलाख की एक गाडी अभी जला दी गयी है


चिखुरी चिचियाने / चंचल
 अंदर बलात्कार होता रहा ,हम राम धुन गाते रहे
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हम दुनिया के सामने , तीसरी बार नंगा हो रहे हैं .
३० जनवरी १९४८ , जब हमने एक निहत्थे फ़कीर को सरे आम उस समय गोली मार कर  ह्त्या कट दी , जब वह राम धुन के साथ लोंगो को सद्भाव से रहने की अपील करने जा रहा था .
किस जाहिल सोच ने गोली चलाई थी ?
जवाब सब को मालूम है , सारी दुनिया जानती है वह छद्म 'हिन्दू ' सोच . गौर करिए उस अंग्रेज महिला के जवाब को जो उसने एक भातरीय को दिया था . भारतीय नौजवान अपने देश की तारीफ़ में बोल रहा था- हम कितने महान हैं जिस धरती पर बुद्ध और गांधी  पौदा हुए हैं . अंग्रेज महिला ने पलटकर पूछा था - इसीलिये तुम महान हो किएक निहत्थे फ़कीर को गोलियों से छलनी कर डाले ? इसका जवाब हम आज तक नही दे पाए हैं . हमे सारी दुनिया के सामने किस सोच ने शर्मिंदा होने को मजबूर किया है ? यह सवाल जब तक नही दे पाओगे , तब तक मेहरबानी करके राष्ट्रप्रेम की बात मत करो लोग तुम पर हँसेंगे . बापू की ह्त्या पर वायसराय की टिप्पणी थी - अगर यह महात्मा गुलाम भारत में मरता तो अंग्रेज अपने उपर लगे कलंक को कभी नही मिटा पाते .एक अन्ग्रेज्की सोच थी और एक ये हिन्दू की सोच ?
दूसरी बार हम शर्मिन्दा हुए ६ दिसम्बर १९९२ को जब अयोध्या में बारी मस्जिद गिरा दी गयी .अब तक हम सारी  दुनिया में दो बातों के लिए इज्जत पाते थे , एक -हम दुनिया के सबसे बड़े
लोकतंत्र हैं और दुसरा सबसे बड़ा तर्क की हम दुनिया में सबसे बड़े सद्भावी देश हैं हना हे एक को अपने अपने मजहब में में जीने की खुली आजादी है .६ दिसम्बर ९२ कोक्या हुआ ? एक धर्म की आड़ में कुल डेढ़ लाख की भीड़ अयोध्या में जुटी और उसने दुसरे धर्म के इबादत गाह पर हमला करके उसे ध्वस्त कर दिया .और दुनिया में यह दर्ज हो गया की भारत एक धर्म विशेष का मुल्क है जहां एनी धर्मों को सलीके से जीने की सुविधा नही है . हम इर शर्मिन्दा हुए और किस सोच ने हमे शर्मिन्दा किया ? अगली नस्ल इसका जवाब खोजेगी लेकिन कमबख्त यह पीढ़ी तो नाकारा साबित ही हुयी , किसने हमे सोच के आधार पर बधिया किया है ?
तीसरी बार पंचकुला ने हमे लबे सडक नंगा कर दिया और हम बेबस होकर इधर उधर झाँक रहे हैं . बलात्कार एक बीमारी है कुछ शीत देशों को छोड़ दिया जाय तो यह बीमारी कमोबेश हर मुल्क में है , हर मुल्क के पास इसका इलाज भी है , बीमार को सजा मिलती है बगैर किसी भेद भाव के . रंग . नस्ल. धन. वोह्दा , रूतबा नके यहाँ कोइ मायने नही रखता , न्याय सब केलिए बराबर है . लेकिन कल पंचकुला की घटना ने हमे नये सिरे से शर्मिन्दा किया है . जब शबे की सरकार और खुद केंद्र की सरकार चाँद वोटो केलिए अपने जमीर का ही सौदा कर ले , यह कल उघार हो गया जब बलात्कार का अपराधी जगमीत न्यायालय में अप्राधिघोषित हुआ तो पहली बार जगमीत राम र हीम को लगा की कल तक हम जिन अबोध भोली भाली जनता को छल कर उसे लूट रहे थे , उसका तन, मन और धन आज वो खुद लुट गया है ,जिसने उससे वायदा किया था . इन अपराधों से मुक्त कराने के लिए वे खुद जनता की अदालत में अपराधी बने खड़े हैं .कल हरियाणा और केंद्र का नेतृत्व बिलकुल नंगा हो गया जब जगमीत की बेटी ने खुले आम यह रहस्य खोल दिया की भाजपा और पापा से जो डील हुआ था की तुम हमे वोट दो हम तुम्हे बलात्कार समेत जितने भी जुर्म हैं उनसे बरी करा देंगे .यह दुनिया की पहली बदचलन सरकार है जो काठ की कुर्सी के लिए तमाम जरायम पेशे को अख्तियार किये बैठी है और एक धर्म की आड़ में दुहाई देगी हिन्दू होने की .
हिन्दू सभ्यता का सबसे बड़ा कातिल अगर कोइ है तो वो ये ही हैं .
अभी और लिखते लेकिन चिखुरी उठ गये , मद्दू पत्रकार एक नई खबर लाये है . आश्रम में दोलाख की एक गाडी अभी जला दी गयी है

Monday, August 21, 2017

chanchal: चिखुरी चिचिआने / चंचलजब पाखण्ड के आतंक से समाज न ...

chanchal: चिखुरी चिचिआने / चंचल
जब पाखण्ड के आतंक से समाज न ...
: चिखुरी चिचिआने / चंचल जब पाखण्ड के आतंक से समाज न  जूझ पाए ------------------------------------------------------------------------------...
चिखुरी चिचिआने / चंचल
जब पाखण्ड के आतंक से समाज न  जूझ पाए
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   नवल उपधिया का कहना है ,- नाला पार पसिआने में दो औरतों का बाल काट दिया बा , और उ दोनों बेहोश अस्पताल में पडी हैं .
बार कटवा . पूर्वी उत्तर प्रदेश से  बढ़ते बढ़ते  पश्चिम की तरफ जा रहा है .जाहिर है उसी अनुपात में नमक मिर्च भी बढेगा . समाज में दहशत है . कयूम मिया के पास गंभीर इलाज है
' औरतें गर बाल छिलवा लें तो जान रहें कहें मगर यह तांता ही ख़त्म समझो . न रहेगा बांस , न बजेगी बासुरी .लखन कहार ने पूछा - तो जे केवल औरतों का ही कट  रहा है , मर्दों का नही ?
उमर दरजी ने टुकडा जोड़ा - जेकरा रही , उही का कटी न / कि लाल साहेब क कटी जे बर बख्त सफाचट रहते हैं . कोलई दुबे नई कहानी के साथ पेश हुए . पाकिस्तान की तरफ से अंग्रेजी
प्लास्टिक क काला भंवरा छोड़ा गया है और वह रात में उड़ता है औरतों को तलाश कर उन पर हमला करता है , छेदी बो ने अपनी आँखन देखी बताय रही हैं तमाम भीड़ जुटी है .गिरी ओझा
झाड फूंक में लग गये हैं . केसरिया कपड़ा से तन धको , कोइ असर नही होगा . कीन उपधिया ने तस्दीक किया - बात तो बिलकुल सही है . जन्तर मंतर में बहुत बल होता है रंग का बहुत असर होता है . उस दिन नही देखा अब अस्पताल के बिस्तर भी भगवा रंग में होंगे .गोरखपुर अस्पताल की नई सजावट नही देखा ? कीन की बात को नवल ने बीच में ही रोक दिया - गेरुआ रंग देख के कीड़ा मकोड़ा चूहा मच्छर सब भाग जाते हैं अब देखो अब तो जो बुलेट ट्रेन आय रही हैं उसके अंदर की रंगाई पोताई भी केसरिया रंग में है . जा रे जमाना ! कितना आसान इलाज्खोज निकाला इस सरकार ने .
बहुत देर तक चुप बैठे भिखई मास्टर ने एक छोटा सा सवाल पूछा -येसी वारदातें इसी मुल्क में होती हैं या दुसरे मुल्कों में भी ऐसा होता है ?
सवाल कठिन था , जाहिर है चुप्पी का फैलना .क्यों की इनमे से कोइ भी इस मुल्क के बाहर जाने की सोच भी नहीं सकता न ही उस तरह की पढाई लिखाई की है .सवाल का एक छोर
मद्दु पत्रकार ने कीन उपधिया की और उछाला - कीन बता सकते हैं विदेश के बारे में , काहे से की आज ये सरकारी पार्टी के गहरे सदस्य हैं और हर तीन घंटे बाद इनका प्रधान मंत्री
विदेश चला जाता है . सो विदेश की जानकारी कींन  को ज्यादा है . कीनसंजीदा हो गये . खैनी मले , सुरती ठोंके फिर मुह खोले - दुनिया में बहुत कम देश ऐसे हैं जहां ये सब अनोखी चीजें
मिलती हों हमारे प्रधानमंत्री जी यही तो बोलते हैं की दुनिया में सबसे कमाल के देश हैं . अचानक चिखुरी चीखे - चोप्प ! तब से बक बक किये जा रहा है , ससुरो तुमलोगों ने देश को कबाड़ा
बना कर छोड़ दिया है . रोयेंगी आने वाली नस्लें . गणेश को  दूध पिलाओ .अत्तर के हनुमान , गणेश सब दूध पीने लगे . भागे रे मुहनोच्वा आवा बा . अकेले जौनपुर में सौ के उपर लोग मारे गये तुम्हारी नालायकी के चलते . कितने विक्षिप्त , पागल , गजेडी . भिखमंगे मुह नोच्वा इ नाम पर मारे गये . नेवादा में रात में ट्रेन रुकी एक फौजी नीचे उतरा शराब के नशे में था . लोगों ने घेर कर मार डाला , मुकदमा आज तक चल रहा है . गलती जनता की नही थी . प्रतिनिधि था , सांसद था , बेदान्ती . घूम घूम कर भाषण दिया है मोह नोचावा के बारे में . अफवाहों के उस्ताद हो , अभी तुम्हारा एक जिम्मेदार नेता बोल रहा है मन्त्र से चीन की सेना को भगा देंगे . यही तो सोमनाथ मंदिर में किया था , मूढ़ता का तुम्हारा पुराना इतिहास है .विदेशी  लुटेरे  आ रहे हैं
साधू सन्यासी मन्त्र पढ़ रहे हैं . मन्त्र मार देगा लुटेरों  को . नतीजा अन्दिर ही नही लुटा , समूचा देश लुट गया . हम गुलामी की नीव डाल बैठे . आज फिर उसी और मुल्क को ले जा रहे हो . इसे रोकना पडेगा . वैज्ञानिक सोच की बुनियाद पर पंडित नेहरु ने जिस समाज की संरचना की शुरुआत की है अगर उसे हमने छोड़ा तो हम कहीं के नहीं रहेंगे .
       पढ़े लिखे लोंगों की जिम्मेवारी  है की वे इस तरह के दकियानूसी अफवाहों से समाज को मुक्त करें .
'सटीक ' कह कर नवल ने साइकिल उठा लिया -
  मिर्जापुर कैल गुलजार हो . कचौड़ी गली सून कैल बलमू

Monday, August 14, 2017

chanchal: चिखुरी चिचियाने /चंचल----------------------------...

chanchal: चिखुरी चिचियाने /चंचल
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: चिखुरी चिचियाने /चंचल --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------...
चिखुरी चिचियाने /चंचल
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बीमार सियासत का चुहुलबाज मुल्क
   अड्डे केवल शहर में ही नही होते , कलकत्ते से चला यह अड्डेबाजी का चलन अब गाँव तक जा पहुंचा है और एक नशा की तरह पुरे समाज में तारी है . कल हमने बताया था की अड्डेबाजी को सरकार ने भरपूर  बढ़ावा दिया . सरकार ने मुलायम पग्दंद्दी को तोड़ कर गड्ढे वाली सडक दिया और माटी की दिया हटा कर बल्व लटकवा दिया ,गाँव सडक पर आ गया और घर घर में
टीवी आ गया / नेता जी मुस्कुराए - कमबख्त विकास देखो , मसायल मत उठाओ . भाड में गयी गरीबी , बेरोजगारी , गैर बराबरी .तुमे हंसने के लिए डिब्बा दे रहा हूँ , उलझो उन कहानियों में जो डिब्बा दिखाएगा . बिजली गायब रहे तो चौराहे पर जाओ देश के नाम सन्देश जारी करो , अमरीका रूस पर ब्यान दो कोइ न मिले तो पाकिस्तान तो है ही . तुम्हारे दिल को बहलाने के लिए पाकिस्तान गरीब की लुगाई की तरह है . लाल साहेब की बेंच पर बैठ कर तीन मिनट में छह बार पाकिस्तान की माँ बहन  करोगे . जब छोटका तुम्हारी माँ  बहन करते हुए दूकान की तरफ बढ़ेगी और भैस के भागने की खबर देगी तो चौराहे की बहादुरी भाग के छोटका के फुकती में घुस जाती है . हर रोज चौराहे पर यह होता है . चिखुरी ने चुटकी ली _ नवल ! पाकिस्तान को मारो गोली , कभी चीन को भी तो कुछ बोलो . पुरी दूकान में सन्नाटा पसर गया .करिअवा कुकुर जो भीड़ की आवाज में सोने का आदी हो चुका है , सन्नाटा पसरते ही कुनमुना कर मूड
उठाया . मौक़ा मुआयना किया और फिर सो गया . कयूम मिया ने टुकडा जोड़ा - चीन पर जब सरकार सनाटा खा जाती है तो नवल उपधिया किस दम पर बोले. अशोक अंडावाले बीडी सुलगा कर सामने आये - ये भाई ! देखते देखते राजनीति ही उल्ट गयी . क्ल्संस्द में बहस होती थी सरकार को जवाब देना होता था . अब न सवाल है , न जवाब .बस पैसा चाहिए . उमर दरजी जनम का मुरहा है बेबात कुबात ही बोलता है - का गलत है भाई , राजा राज कर रहा है प्रजा ऐश कर रही है कोइ समस्या है इस देश में ? ना है न .बस ऐश करो . मद्दु ने करवट बदला गौर से सब को निहारा और शुरू हो गये -
         
    ' हस्बे जेल अर्ज कर दूँ कि हम ऐसे मुल्क की नब्ज पर हाथ रखने जा रहे हैं जिसे पहली नजर में आप खारिज कर देंगे , क्यों की आप  उस  समाज के नुमाइंदे हैं जो गंदगी को देख कर
डगर बदल कर आगे बढ़ जाते हैं या उस पर गमकती रुमाल रख कर ढँक देंते हैं लेकिन गंदगी को साफ़ नही करते .मसलन आजका भारत देखिये हर तरफ झूठ फरेब का ऐसा जाल  फैला दिया गया है की हर इंसान तकरीबन उस झूठ  के सहारे हम हर सवाल का हल ढूंढने लगा है . ' आज मद्दु पत्रकार कुछ ज्यादा ही संजीदा दिखे और जो बात उन्होंने बोला उसके बारे में नवल उपधिया का कहना है की आप जो बोल रहे हैं एंटिना में नही फंस रहा है . मद्दु उखड़ गये - सुनो ! एक बात बताओ १४ में संसद का चुनाव हुआ किस मुद्दे पर ? भूल गये होगे , हम बता रहे हैं .  बड़ी चालाकी से , समाज के हर हिस्से के लिए अलग अलग सवाल दिए गये थे . एक - आम आदमी के लिए , महगाई .इसका हल - हर खाते में मुफ्त का पैसा सरकार दाल देगी  . पढ़े लिखे डपोर लोंगो के लिए भ्रष्ट्राचार . नौजवानों के लिए काला धन वापस होगा . नतीजा .संसद में वजीरे तिजारत जनाब अरुण जेटली जवाब देते हुए कहा वो तो चुनाव के बोला गया जूमला था . कमाल है देश का नेता जनता में जूमला बोल कर वोट माँगा है मुकर जाता है क्यों ? है किसी के पास जवाब ? क्यों नही उठता संसद में सवाल ? अब चिखुरी की बारी थी -
संसद की हालत देखो , कौन बैठा है आज संसद में ? सरकारी आंकडा है पिच्चासी फीसद संसद सदस्य  करोड़ पति है . साथ फीसद लोगों पर अपराधिक मामले हैं ,  बलात्कार . चोरी . चम्चोरी , लूट दंगा . कौन बैठा है देश की सबसे बड़ी पंचायत में . ?   जहां  कभी पंडित नेहरु बैठते थे , लाल बहादुर शास्त्री , डॉ  लोहिया , कृपलानी , ज्योतिर्मय बासु , सवाल उठते थे आम आदमी के . जनता संसद को अपना मानती थी .उसी संसद में गाजी पुर के विश्व नाथ गहमरी का गरीबी पर भाषण है पंडित नेहरु की आँख भर आयी थी . उसी संसद में डॉ लोहिया ने चुनौती दी थी पंडित नेहरु की सरकार को . संसद की पुस्तकालय में आज भी वह बहस मील का पत्थर बन कर . तीन आने बनाम तेरह आने . लेकिन दोषी संसद सदस्य नही है . गलती उनकी है जिन्होंने ऐसे लोंगों को चुन कर संसद पहुचाया .
लखन कहार का सवाल टेढा है -अब क्या करें ?
कुछ ख़ास नही , बस अपने चुने हुए प्रतिनिधि से पूछिये -संसद में . विधान सभा में आपने जो काम किया है उसे जनता को बताओ .
नवल मुस्कुराए . साइकिल उठाये . घंटी बजाए . पैदल चले . कयूम ने पूछा - का बात है बेटा - पैदल ? नवल मुस्कुराए - साइकिल क कुत्ता फेल .
नवल गाते हुए जा रहे हैं - मिर्जापुर कैल गुलजार हो कचौड़ी गली सुन कैल बलमा       

Monday, August 7, 2017

chanchal: चिखुरी चिचियाने / चंचल---------------------------...

chanchal: चिखुरी चिचियाने / चंचल
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: चिखुरी चिचियाने / चंचल -------------------------------------------------------------------------------------------------------------------...
चिखुरी चिचियाने / चंचल
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९ अगस्त महज एक तारीख नही है .
     
         अगरचे यही रहा तो कुछ दिन में चिखुरी ' काठे मार ' दिए जायंगे . पागल होने में अब कोइ कोर कसर नही है .  नवल उपधिया की पुरानी आदत है , कोइ भी बात बताने के लिए
कमबख्त  ढेढ़ हाथ की भूमिका लगाएगा . आँख बंद कर के खैनी मलेगा .तब तक लोग उब चुके होते हैं और उत्सुकता बढ़ चुकी होती है .कयूम मिया ने पूछ् पकड़ा - हुआ का , अभी कल तक तो भले चंगे थे अचानक पगला कैसे गये ? अभी आ रहे हैं  देखना . आज सुभ से ही हर एक से सवाल पूछ रहे हैं - नौ अगस्त के बारे में बताओ . अब भला  कोइ क्या बताये की नौ अगस्त
का है ? लखन कहार ने इशारा किया वो देखो चिखुरी काका भी आ गये . लोग चौंके . आज तो चिखुरी का पूरा हुलिया ही बदला हुआ है . खादी का कुर्ता .जवाहिर जैकेट , टोपी , खादी की
बी कायदे धुली हुयीधोती पैर में चट्टी और हाथ में तिरंगा लिए चले आ रहे हैं .पीछे पीछे जमा पूँजी चार लड़के कांग्रेस जिंदाबाद , महात्मा गान्ही अमर रहें . 'कुट्ट इंडिया जिन्नावाद . हर जोर जुर्म के टक्कर में ....... /  चौराहा सावधान . दुकानदार गाहक छोड़ कर सडक पर . जनता एक दुसरे की आँख में आँख दाल कर पूछ रही है , - माजरा क्या है ? लेकिन जब किसी को मालुम हो तब बताये न की माजरा क्या है . लाल साहेब ने उमर दरजी से पूछा - आज पन्द्रह अगस्त है का ? हमरे समझ से तो ना है .आहे से की कल सात रहा रछा बंधन वास्ते एक दिन बीच में आवा तदौड़ के पन्द्रह कैसे होय जाई . कीन उपधिया आजकल ज्यादा बोलने लगा है ,उसकी सरकार है वह नही बोलेगा तो कौन बोलेगा . किन  की दूकान बंद है दुसरी दूकान चालु है . हैण्ड पम्प चाहिए ? करताहूँ कुछ और इस कुछ से ही कीन कीदुकान चल रही है . लेखी होंगी प्रवक्ता दिल्ली की , यहाँ तो सरकार को उबार रहे हैं कीन उपधिया ही . चिखुरी से कीन की कत्तई नही जमती , पर का करे अक्खा समाज चिखुरी के साथ . आज कीन को मौक़ा मिल गया है - चिखुरी को देखो भाई ! आज य पन्द्रह अगस्त मनाय ले रहे हैं . कुछ और भी बोलते पर इतने में चिखुरी का जुलुस लाल्साहेब की चाय की दूकान तक आ पहुंचा . लड़के नारा लगाए जारहे हैं , कुछ हो हल्ला , कुछ भीड़ भड़क्का देख कर और भी लोग आ पहुंचे बच्चे तो कुछ ज्याडा ही .
नारा दुगुनी गति से उपर उठ गया . चिखुरी लाल साह्ब्की दूकान के अंदर चौकी पर जा बैठे , जहां हर रोज बैठते रहे हैं. बात उठाया मद्दु पत्रकार ने - आज से ही पंद्रह अगस्त मन्ने लगा काका ? चिखुरी ने तरेर कर देखा - पत्रकार हो न ? बड़ा गर्क हुआ केवल राजनीति से ही नही . तुम लोंगों की कम अकली ने बहुत जल्दी डुबोया है समाज को . नौ अगस्त भी नही जानते ? जब तुम्हारे जैसे पत्रकार इतने पर खड़े रहेंगे तो इनका क्या होगा जो सामने बैठे हैं लखन कहार , उमर दरजी , नवल उपधिया , लाल साहेब सिंह वगैरह .मद्दु ने अपनी असमर्थता जाहिर की - वाकई हम नही जानते दादा . हममे से कोइ जानता है भाई ? एक मस्ट आवाज आयी - कोइ नही  जानता , बताया जाय . नवल ने प्रस्ताव रखा - ऐसे नही , दादा के लिए चौकी बाहर निकाली जाय . झंडा है ही एक भाषण हो जाय . ससुरे चुनाव न आये तो भाषण भी न सुनायी पड़े . नवल ने नारा लोकाया , बच्चों ने बीच में ही लोक लिया . कीन उपधिया जानते हैं किचिखुरी पुरानेज्माने के सुराजी हैं कांग्रेस की तारीफ़ करेंगे .पर डर की वजह से चुप ही रहे .
           पूरा चौराहा भर गया . घास की तलाश में निकला महिलाओं का झुण्ड भी एक किनारे खडा हो गया . मंझारी से बगैर बोले नही रहा जाता , लम्मरदार से बोली - हे देवर ! हिया कुछ बटी का ? लम्मर दार ने गौर से मंझारी को देखा और बोले _ हुंडी बटी , चाहि का ? मंझारी के लिए हुंडी नई बात थी वह चौंकी _ हुंडी ? कैसा होला ई ? लम्मार्दार ने इशारे से बगैर कुछ बोले , बोल गये . महिलाओं की और से खिलखिलाहट हुयी , कई मनचले जो मौक्ये वारदात पर थे जोर से हंस दिए और सारी भीड़ इधर देखने लगी . लम्मार्दार ने हांका मारा - बोला जाय पब्लिक व्याकुल होय रही बाय , अब चिखुरी मंच में चढ़े .तालिया बजी . और भाषण शुरू
        ' हम कोइ नेता ना हैं , आम आदमी हैं , और उसी आदमी के बारे में बोल रहा हूँ . बुरा मत मनाइएगा हम मरे हुए समाज को दफनाने की जुगत में हैं . जो समाज अपने इतिहास से वाकिफ नही होता , उसका वर्तमान लम्पटों , आढतियों और टेनीमार व्यापारियों के हाथ में खेलता है और उस समाज का भविष्य गर्त में जाता है . आज हम उसी मुकाम्पर खड़े हैं
आज नौ अगस्त है हमारे इतिहास का एक सुनहरा पन्ना आज के ही दिन लिखा गया है , पर दुर्भाग्य देखिये इस मुल्क को विशेष कर नई पीढ़ी को यह तारीख भी नही मालुम है .
आज से ठीक पचहत्तर साल पहले सुराज की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस पार्टी का बम्बई में जलसा था . उस सम्मेलन में महात्मा गांधी ने बर्तानिया सरकार को चुनौती दी और नारा दिया -
 अंग्रेजो भारत छोडो , क्विटइंडिया . डू आर डाई / करो या मरो . यह है नौ अगस्त बयालीस का आन्दोलन . आधे घंटे के अंदर समूची कांग्रेस गिरफ्तार कर ली गयी . कुल डेढ़ लाख लोग एक घंटे के अंदर जेल भेज दिए गये .अब जनता ने आन्दोलन अपने हाथ में ले लिया इसका नेतृत्व चला गया समाजवादियो के हाथ डॉ लोहिया , अचुत पटवर्धन , जी जी  पारीख वगैरह .लेकिन सबसे ज्यादा बढ़ चढ कर महिलाओं ने आन्दोलन को चलाया आज जिसे आजाद मैदान बोलते हैं वहाँ देश की एक क्रांतिकारी लड़की ने कांग्रेस का झंडा फहरा कर दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्य को चुनौती दी , उनका नाम है अरुणा आसफ अली . गुप्त रेडियो का संचालन किया है उषा मेहता ने . आजादी की उस लड़ाई में अंग्रेजों का साथ देनेवालों में जिन्ना की मुस्लिम लीग थी , राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ था और कम्यनिस्ट पार्टी थी . ये सब अंग्रेज के साथ थे . कांग्रेस अकेले लड रही थी , उस अंग्रेजी साम्राज्य से जिसके हुकुमत में सूरज नही डूबता था .
तालियाँ बज रही है , नम आँख में चिखुरी सुराजी बच्चों को निहार रहे हैं .
नवल गाते हुए रवाना हुए - झंडा उंचा रहे हमारा 
पर कथा / चंचल

सुनती हो  ! जी यस टी  सिजेरियन है
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   हुकूमत की अपनी भाषा होतीहै और जनता की अपनी . हुकूमत जनता की भाषा समझती है पर जनता हुकूमत की भाषा से दूर ही  रहती है . यह मैकाले की युक्ति है .
मैकाले के पहले भी , तंत्र कोइ भी रहा हो हुकूमत अपनी अलग की जुबान रखता है . जब धर्म सत्ता पर काबिज था और समाजका नियंत्रण वह करता था तब भी यही चलन था
बाइबिल इब्रानी भाषा में इसाईयत को विस्तार देतीहै /इस्लाम का कुरआन अरबी में है . सनातन धर्म संस्कृत में , इन तमाम  धर्मो को मानने वाले  लोग अपनी धार्मिक भाषा से
कोसों दूर है . धर्म के नाम पर लूट की जो व्यवस्था बनी उसमे अजनवी भाषा को एक हथियार के रूप में रखा गया. हमने जिनका जिक्र किया ये सब अपने काल में सत्ता रहे हैं
और आज जब सत्ता का स्वरूप बदला जनतंत्र आया तो भाषा भी बदल गयी लेकिन मूल भावना वही रही की सत्ता की भाषा से जन भाषा अलग रहे .सबसे मजेदार मौजूदा
सरकार की भाषा है .ये जब तक सत्ता में नही थे तब तक- हिंदी , हिन्दू और हिन्दुस्थान चीखते रहे . सत्ता में आते ही अंग्रेज हो गये , एकभी नारा इनका हिंदी में नही मिलगा .
मेक इंडिया , इंडिया टीम , ब्लैक मनी , डी मोंतेजायेसन . अब जी यस टी . चारो तरफ शोर हुआ जी यस टी . खबर पहिये पर तो चलती नही ,ये तो उडती है तो हवाकी भी हवा
 निकाल दे. ती है .  गाँव की अपनी सिफत होती है , उसका अपना नजरिया होता है , भाषा और मुहावरे तो ऐसे होते हैं की घोड़ा नस कटा गाजीपुर में औ पता चला गाजियाबाद में
संवाद सुनिए -
- देवर ! इ जेय्स्टी का है ?
- देख्बू का ?
- सुना है रात में बाढ़ बजे निकला ?
- हाँ , अटक गवा रहा .
- कोलई कहत रहे की सिजेरियन निकला .
 गाँव में पिछले बीस साल से यह शब्द घर घर में आ गया है जिसे सिजेरियन कहते हैं . अब न ओ माएं रही जो आराम से आम्खाते खाते बच्चा दे जाती रही ,चमाइन की हंसिया से
 नाल काट कर अँधेरे बंद कमरे में दाल दिया जाता रहा . अँधेरे से निकला बच्चा आहिस्ता आहिस्ता रौशनी से मिलता था तब तक आँख की रेटिना रौशनी सहने लायक होजाती थी
अब बच्चे अस्पताल में होते हैं , पैदा होते ही हैं ट्यूब  लाईट में  नतीजा ? तीन साल बाद आँख पर चस्मा . तो यह जी यस टी भी सिजेरियन है . पेट्रोल, डीजल , और कश्मीर को
छोड़ कर बाद बाकी हर जगह , हर सामान पर जी यस टी का भार बढ़ा मिलेगा . यह पहली सरकार आयी है जो अखंड भारत तो चीखती है लेकिन अपने ही एक सूबे कश्मीर को
भारत से बाहर कर दिया . पुरे देश में यह टैक्स लगेगा लेकिन कश्मीर में नही . डीजल पेट्रोल पर इस लिए नही लगेगा की अगर डीजल पेट्रोल पर जी यस टी लगा तो पेट्रोल और डीजल
४० प्रतिशत दाम नीचे गिर जायगा . क्यों की जी यस टी कुल २८ फीसद टैक्स लगाता है और देश को जो डीजल पेत्रोल्स्र्कार बेच रही है ४५ फीसद मुनाफे पर . इस जी यस टी से जो तीन बातें होने जा रही हैं य=उसे गौर से देखिये .
अह्गाई - बढ़ेगी
क्रयशक्ति - घटेगी
पूंजी - केन्द्रित होगी .
उपचार ?
कारखाने के माल का वहिष्कार .
और खलिहान के उत्पाद का चलन बढाओ.