Monday, December 7, 2015

बतकही /चंचल
मेरी खूबसूरती का राज है ......
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       .......तुन्नी बम्मई कमा के लौटा है .बीबी बच्चा समेत आया है . दीवाली मनाने . पूरे घर में औ गाँव में हर कमासुत पूत की कद्र होती है . तुन्नी अपने पूरे परिवार की इज्जत बढाने में लगा रहता है . ... तुन्नी की बीवी जब बिआह के आयी तो उसका नाम उसके गाँव के साथ  जोड़ कर गोह्रराया  जाने लगा . आठवीं तक पढ़ी रामरत्ती यहाँ 'परानपुर वाली ' हो गयी ,लेकिन वही परानपुर वाली जब कमाऊ भतार के साठ बम्मई से वापस आयी तो उसका नाम भी बदला हुआ मिला ,अब वह पिंकी है .एक एक साल के अंतर पर पैदा हए तीनो बच्चे बंटी , सनी और स्वीटी बोले जाते हैं . एक दिन तुन्नी के घर कोहराम मच गया क्यों कि बंटी छैला गया है कि वह चिप्स खायेगा . तुन्नी के बाप लम्मरदार जो अभी ज़िंदा हैं ने जब चिप्स सुना तो उसनाता खा गए . ई चिप्स का होता है भाई ? खदेरन कहांर ने बताया - ये भी नहीं जानते ये एक तरह का नमकीन है जिसे सेफ अली खाता है टीवी पे नहीं देखे हैं ? बगल में लडकियां रहती हैं ,बहुते कम कपड़े में . हम खाए तो नहीं हैं लेकिन टीवी पे देखा है . राम लाल की दूकान पे जरूर मिल जायगा . लम्मर दार ! अब ज़माना बदल गया है शहर का कोइ भी समान हो गाँव तक आ गया है . जाओ और खरीदो . नकद . और वही लम्मर दार राम लाल की दूकान से लौट रहे हैं ,एक हाथ में बांस का डंडा दूसरे हाथ में चिप्स का पाकेट लिए ,लफारक़दमों से घर की ररफ भागे जा रहे हैं .काहे से कि बंटी रो रहा होगा . लेकिन बीच डगर में उमर दरजी टकरा गए - सलाम साहेब ! कहीं दूर तक गए रहे का ? लम्मरदार रुके , तरेर कर उमर दरजी को देखा - सुन बे उमर ! हम बीस बारे बोले हैं कि टोका टोकी मत कियाकर लेकिन तै अपनी आदत से बाज नहीं आएगा . तेरी माँ की ..... . उमर ने फिस्स से हंस दिया - ऐसा तौवा रहे हो जैसे नाती की बरात लेकर जा रहे हो , सीधे सीधे जवाब भी देते नहीं बनता . ई का साबुन खरीदे हो का ? अबे ई साबुन दिख रहा है का ? ई चिप्स है . उमर ने पाकेट हाथ में ले लिया - ई चिप्स का होता है ? लम्मरदार जानते हैं उमर उन्हें छेड़ने की गरज से बतिया रहा है . सो लम्मरदार ने उमर के हाथ से पैकेट खींच लिया और भद्दी सी गाली देते हुए आगे बढ़ गए . यहाँ गाली गाँव की रवायत का एक हिस्सा है . जाति , मजहब , उंच नीच , औरत मर्द सब अपनी जगह लेकिन गाँव में हर कोइ हर किसी का कुछ न कुछ लगता है . इस रवायत में लम्मरदार उमर दरजी के बाप लगते हैं इसलिए धडल्ले से उमर की माँ के साथ  रिश्ता जोड़ लेते हैं . लम्मरदार चिप्स लेकर अपने घर चले गए लेकिन उमर ने चिप्स कीकहानी को चौराहे पर बिखेर दिया - सुनो हो पंचो ! लम्मरदार अब चिप्स का नाश्ता करते हैं .
       विकास के नाम पर जब से गाँव में सड़क आयी है , हर गाँव के पड़ोस में एक चौराहा बन गया है जहां चाय की दूकान एकाध सैलून , मोबाइल की दूकान कपड़ा प्रेस करने का खोखा आदि आदि सज गए हैं और इसी चौराहे पर आसपास के गाँव के लोग आ जुटते हैं और चाय के साथ जरूरी और गैर जरूरी बातों के किस्से खुलते हैं . आज लम्मरदार का चिप्स जेरे बहस है . बात की शुरुआत भिखई मास्टर ने की - भाई बहुत दिन हुए थे अरहर की डाल खाए हुए . कल पेंशन मिली तो सबसेपहले अरहर की डाल खरीदा . दो सौ रुपया किलो ... पचास रूपये का पाव भर लिए . ज़माना कहाँ से कहाँ गया . ई महगाई तो जीते जी मार देगी . सरसों का तेल , गुड़ , का चीज सस्ती है ? उमर ने टुकड़ा जोड़ा - किसने कहा डाल खाओ , चिप्स खाओ . पांच रूपये में एक पैकेट . यह बात उमर ने लम्मरदार को देख कर कहा जो चिप्स पहुंचा कर वापस चौराहे पर आ गए रहे और लाल साहेब के चाय की दूकान पर पैर ऊपर किये बेंच पर बैठे रहे . चिप्स सुनते ही लम्मा दार जामा के बाहर हो गए - देख उमर ! मुरप्पन मत कर . अबे हम्मे का मालुम कि चिप्स का होता है उतो तुन्नी के लडिका वास्ते ले गए रहे .आज के जमाने में पांच रूपये की कीमत ही का ? बात के बीच में राहुल आ गए . राहुल परधान क लडिका है , बनारस से पढ़ी के वापस गाँव आ या है , कह रहा है नौकरी नहीं करेंगे , गाँ में ही काम करेंगे . खादी पहनता है और हर बात को उलटता रहता है . इसीलिए लोग उसे पगलेट बोलते रहे , लेकिन जब से उसने गाँव में आये छोटे जिलाधिकारी को हडका के उसकी बोलती बंद कर डी है तब से उसकी बात सुनी जाने लगी है . राहुल ने कहना शुरू किया - एक बात जान लो सड़क और बिजली गाँव के विकास का मापदंड नहीं है . उसकी उपयोगिता से विकास नापा जाता है . गांधी की मंशा थी गाँव को मजबूत करो उसका विकास करो ,इसके तहत सड़क और बिजली आयी लेकिन नतीजा देखो . जिस सड़क से गाँव का सामान मंडी तक जाना था वो तो हो नहीं पाया ,अलबत्ता शहर का कूड़ा इस सड़क से गाँव में आ गिरा . बिजली आयी थी कि गाँव में खेती के साठ कुटीर उद्योग लगे . छोटे मोटे कारखाने लेंगे . लेकिन गाँव में बिजली का उपयोग का हो रहा है ? घर घर में टीवी लग गयी . टीवी ने क्या दिया ? तुम्हारी आदत बदल दिया . भांति भांति के कचड़े टीवी पर बिकने लगे . गाँव का उत्पाद मरा . गाँव का पुश्तैनी पेशा मरा . प्लास्टिक के दोनापत्तल चले , प्लास्टिक की गिलास और पुरवा चलन में आ गए . किसका हाथ कटा ? लोहार कुम्हार सब मारे गए .
... राहुल और  बोलता लेकिन इसी बीच एक मोटर साइकिल आ गयी और राहुल उठ कर उधर बढ़ गया .लेकिन जाते जाते चिप्स के बारे में खड़े खड़े बोलता रहा . सात ग्राम चिप्स की कीमत पांच रुपया है , हिसाब लगाओ एक किलो चिप्स कितने का होगा ? सात सौ चौदह रूपये अट्ठाईस पैसा. लेकिन उस पर चर्चा नहीं होगी कि कारखाने के माल पर कितना मुनाफा आ रहा है ?  कल बात होगी इसके आगे , अब वक्त है कि इनका बहिष्कार करो और .....