Monday, November 13, 2017

बतकही /चंचल
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दाम बांधो वरना गद्दी छोडो
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  बड़ा कमाल का निजाम मिला है . कमबख्त हमारा क़त्ल करता है , और इल्जाम भी हमी  पर डाल कर ताली पीटता है .१४ में चुनाव होगा इसकी पृष्ठिभूमि  १२ से ही बनने लगा , सियासत के नाम पर
जुम्लाबाजी करने वालों ने एक गिरोह बना इसमें मीडिया , अढतिया व्यापारी , चमकदार कुछ नाम मुट्ठी भर  बुद्धि जीवी .दुनिया महगाई के दौर सेगुजर रही थी , भारत ने अपनी अर्थ व्यवस्था को रोके रखा
इतना ही नही भारतीय समाज को किसी तरह का दिक्कत का सामना न करना पड़े , इसके लिए नौकरी पेशे से जुड़े लोंगो के लिए छठवा वेतनमान लागू किया और दुसरी तरफ किसानों की कर्जमाफी का
 ऐलान कर दिया . यह सासारी दुनिया के लिए एक नजीर बनी .यह बात प्रतिपक्ष को अखर गयी और उसने खेल शुरू किया .एक अपढ़ और लंठ अन्ना हजारे को पकड कर उसे गांधीवादी घोषित किया और उसकी
आड़ में संघ अपना खेल खेलता रहा . जनता के सामने महगाई को बढ़ा चदा कर पेश किया जब की वेतन बढ़ोत्तरी और किस्सान की कर्ज माफी को बिलकुल छिपा गया .मीडिया , कारपोरेट घराने और अध्तिया व्यापारी
मिल कर कांग्रेस को कटघरे में खडा कर दिया . नजीजा हुआ कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गयी .
  आज वह पुराने सवाल जिन्जिन पर चढ़ कर भाजपा हुकुमत में आयी वे जस का तस ही नही बने पड़े हैं बल्कि महगाई और भी बढ़ गयी है . घपला और घोटालों में चालीस फीसद का इजाफा हुआ है . जो बची खुची
अर्थ व्यवस्था थी उसे एक देश एक टैक्स के नाम पर जी यस टी लगा कर माध्यम और लघु उद्योग को दफना दिया जिससे रातो रात बेतोज्गारी साठ फीसद बढ़ गयी . नोट बंदी की अफरातफरी में बैंक की कमर तोड़ दी
प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरू आत की और ऐलान किया की वदेशों में जमा काला  धन वापस लायेंगे और एक एक खाते में १५ , १५ लाख रूपये जमा होगा .झूठ फरेब और मक्कारी से जनता को छला गया
अब एक एक कर के सब राज खुल रहे हैं . देश के कुल सात घरानों ने बैंक से कर्ज लिया , और  वापस देने से मना कर दिया .सरकार ने उन्हें माफ़ कर दिया सब मिला क्र देश की पूंजी का बटवारा , चंद सियासी लोग ,
कुछ मुह लगे नौकर शाह और कारपोरेट घराने में बंट गया . तुर्रा यह की यस  सारी पूंजी जनता की गाढ़ी कमाई का है .
    इसी हफ्ते देश को अजीब सुचना मिली की किस तरह विदेशों में देश का पैसा जमा है , जब सरकार ने वे नाम बताने से इनकार किया तो अन्तराष्ट्रीय खोजी पत्रकारिता समूह जिसमे भारत के दो अंग्रेजी अखबार भी सदस्य हैं
ने ; पैराडाइज ; नामक खुलासे में कई नाम खुल गये जिसे इंडियन इक्सप्रेस ने छाप दिया जिसमे सरकार के कई लोग शामिल हैं . दुसरी तरफ सांसद और मंत्री जयंत सिन्हा और संसद में सबसे बड़े धनी ए के सिन्हा भी
फंसे पड़े हैं / यह सब खुलना शुरू हुआ है . लेकिन सबसे पहले महगाई पर .
     २०१९ में संसद का चुनाव होना है , भाजपा जिस गति से उपर गयी थी , उसकी चार गुना गति से लुढक रही है ऐसे कांग्रेस का आना तय है . कांग्रेस जनों समेत कांग्रेस के तमाम समर्थक समूहों से अपील है की
वह कांग्रेस पर दबाव डाले की सरकार बनते ही सबसे पहले ' दाम बांधों ' पर अम्ल होगा . अगर खेत खलिहान के उत्पाद की कीमत सरकार तय करती है तो कारखाने के उत्पाद की भी कीमत सरकार तय करे . उसका
 नियम कानून बने . उत्पाद के लागत खर्च पर एक निश्चित प्रतिशत थ ही , कारखाना मुनाफ़ा कमा सके .
                                                                                                      'कांग्रेस से मांगो
                                                                                                       दाम बांधो

Saturday, October 28, 2017

वह खुद के खिलाफ क्यों है

अचानक वह अपने ही खिलाफ क्यों हो गया ?
कल प्रधानमंत्री मोदी पत्रकारों के साथ' दीवाली मिलन '(?) मनाने
पार्टी दफ्तर आये थे  । इंतजामात भी वही पुराने थे , मुखिया से पत्रकारों की दूरी भी उतनी ही थी । किसी ने पूछा - मिलन इसे ही कहते हैं ? दूसरा खुंदक में था - ये नए निजाम का मिलन है , मिलो नही तो बाहर का रास्ता देखो । प्रधानमंत्री ने शिक्षित किया - दल के अंदर जनतंत्र खत्म है उसे बहाल करना होगा । एक पत्रकार ने गर्दन नीचे कर के दोनो हाथ ऊपर उठा कर ताली बजाई ।
ताली ने ताला खोना शुरू किया ।
जनाब ! आप  संघ के कार्यकर्ता ही नही रहे , उसके प्रचारक रहे हैं । संघ में जनतंत्र है ? संघ संवैधानिक रूप से पंजीकृत संस्था है ? संघ का कारोबार ,उसका दफ्तर कैसे चलता है , लेखम जोखा होता है क्या ? संघ मेसवाल पूछा जाता है ?
अचानक आप अपने ही खिलाफ क्यों हो गए ? आज आपके चेहरे की रंगत उड़ी उडी रही ।
गुजरात ने कुछ कह दिया है क्या ?

Monday, October 16, 2017

chanchal: बतकही / चंचलचल खुसरो घर आपनो--------------------...

chanchal: बतकही / चंचल
चल खुसरो घर आपनो
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: बतकही / चंचल चल खुसरो घर आपनो -----------------------------------------------------------------------------------------------------------...
बतकही / चंचल
चल खुसरो घर आपनो
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  बेअदबी माफ़ हो , हम जौनपुर वाले निहायत गलीज समाज बनते जा रहे हैं .आंख बंद कर के सोचिये की आपकी सोच अपने तक ही महदूद है या अपने से हट कर भिक्छ सोचते हैं ?
अगर आप थोड़े से भी इमानदार हैं आप बे झिझक  यह मान लेंगे कि बात तो सही है . कल तक ऐसा नही था .आप लाख अपने कोअपनी खाल में घुसेड़ने कीकोशिश  करते लकिन नही कर
पाते क्यों की आपके रिहाइश  के  ठीक बगल  में एक सडक लेती हुयी है जिस पर लोग आवा जाहि करते रहते हैं ,लेकिन बाज दफे उस सडक का पारा गर्म होजाता रहा और उस
चलने वाले लोग जोर जोर से चीख चीखकर कह रहे हैं  - ' दम है  कितना दमन में तेरे देख लिया , फिर देखेंगे ' . दरवाजे को  कुण्डी चदाकर बंद कर भी लेंगे , खिड़की के पल्ले चढ़ा
  लंगे तब भीआवाज अंदर आयेगी  ही . क्यों की हर मकान में एक रोशनदान होता है , इंसान के अंदर के जमीर की तरह वह आपको आगाह करता ही रहेगा . बहर हाल बाहर सडक
की गर्मी घर में आयी , बीवी ने दरियाफ्त किया , बच्चोंका कुतुहल उठा , दीवान पर लुढके बाबा ने अंदाज लगा लिया और मुस्कुरा दिए .आपने बीवी को समझा दिया - सिरफिरे लोग हैं कुछ
काम काज है नही सरकार के खिलाफ नारे बाजी कर रहे हैं .बच्चों के कुतुहल  को आपने घुड़की दे दी .किताब में मन लगाओ . बाबा ज़िंदा है यह बताने के लिए उनका खांसना जरूरी होता जा
रहा है . बच्चो ! इधर हमारे पास आओ हम बताते हैं .बच्चे फदर फदर भाग कर बाबा इ बगल बैठ जाते हैं - गौर से समझ लो. यह नौजवानों का जुलुस था . भीड़ और जुलुस में फर्खोता है
, भीड़ जूनून लेकर बहकती है , जुलूस होश में अपने हक के लिए तनकर चला करता है .यह नौजवानों का जुलूस था .

- आपने इस अँधेरे से के

से देख लिया की यह नौजवानों का जुलूस था ?
- तुमने नहीं  सुना किवे क्या बोल रहेथे ? बोल रहे थे -तवा कढाई सस्ती हो , दवा पढाई मुफ़्ती हो .   रोजी रोटी दे न सके , वो सरकार निकम्मी है , जो सरकार निकम्मी है वो सरकार बदलनी है
यह नौजवान का ही नारा हो सकता है , वो अपने लिए नही सब की बेहतरी के लिए उठ खडा हुआ है .लेकिन इस जुलुस में वो हन्नू भाई थे अब तो बूढ़े हो चले हैं ?
- बच्चे ! नौजवान का नाप उम्र से नही होता ,जज्बे से होता है नौजवान होने के लिए तीन शर्तें हैं जो इन्हें पूरा करे वो नौजवान है .एक - जो भविष्य के बारे में रंगीन सपना देखे ,
 दो - परमार्थवादी दृष्टि कोण हो और तीन - जोखिम उठाने की क्षमता हो .
- और ये जो नौजवान लोग सरस्वती शिशु में रोज शाखा लगाते हैं ?
-ये विधर्मी हैं , नौजवान कत्तई  नही हैं .ये भविष्य की बात ही नही करते , अतीत के अलावा इनके पास कुछ भी तो नही है . यह संवैधानिक संगठन भी नही है .इसका पंजीकरण
नही हुआ है .नका लेनदेन गुप्त रखा जाता है . इस गिरोह में महिलायें वर्जित हैं ये नौजवान नही हो सकते .
- तो जौनपुर का सबसे तेज तर्रार नौजवान कोइ है ?
- बहुत हैं , ओम प्रकाश श्रीवास्तव . हनुमान सिंह . हनीफ भाई . राजेश सिंह दया सागर राय . सुरेन्द्र त्रिपाठी , लेकिन दिक्कत क्या है की ये अभी बैठे मुद्दे की तलाश में हैं और
 मुद्दा लबे सडक पडा छटपटा रहा है .
- हमे स्कूल में बताया गया है की सरकार की आलोचना करना जुर्म है .
- तो उसने यह बताया होगा , जो इस तरह की बात करते हैं वे या तो जालिम होते हैं या जाहिल .
- फ्रांस का सबसे क्रूर तानाशाह हुआ है  द गाल . सरकारी कारकूनो ने ड गाल से शिकायत किया की जाँ पाल सार्त्र आपके खिलाफ लिखते बोलते हैं उसे देश निकाला दे दिया जाय
- द गाल ने जवाब दिया था - लोग फ्रांस को डगाल की वजह से जानते हैं .
- बाबा ! हम भी जुलुस में जाँय. ?
- इसका फैसला तुम्हे करना है .
- पापा मना करेंगे ?
- प्रहलाद के पापा ने भी तो मना किया था . ध्रुव , प्रहलाद आज भी जुलुस में साथ साथ चलते हैं . इन्ही लोंगो का दिया हुआ हथियार है सिविल नाफरमानी .गांधी जी ने सारी दुनिया
को दे दिया .
दोनों बच्चे दरवाजा खोल कर बाहर निकल गये . बाप मुस्कुरा रहा है .
आपको याद है जौनपुर कब बूढा  हुआ ?

Monday, October 9, 2017

chanchal: बतकही / चंचलकहाँ तो तय था , चरागाँ  हर एक घर के ...

chanchal: बतकही / चंचल

कहाँ तो तय था , चरागाँ  हर एक घर के ...
: बतकही / चंचल कहाँ तो तय था , चरागाँ  हर एक घर के लिए . ---------------------------------------------------------------------------------...
बतकही / चंचल

कहाँ तो तय था , चरागाँ  हर एक घर के लिए .
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   सियासत बहुत दुरुस्त सलीका है , बशर्ते आप उसे ओढने बिछाने की तमीज जानते  हों .इतिहासिक तथ्यों  को सिलसिलेवार सामने रख कर देखा जाय तो देश में महज एक पार्टी है
जो मुल्क  की नब्ज पर हाथ रख कर फैसला करती है , वह है कांग्रेस .अगर आप अभी हाल में  में जवान हुए हैं तो आप को यह बात कम पचेगी .क्यों की आपकी भूख आप नही तय  कर पा रहे हैं
वह कहीं और से तय हो रहा है .आपको उत्तेजित करने वाला नारा चाहिए . छोटी सी झपकी के बाद आपको लाखों लाख रुपया चाहिए . आपको सुंदर पर कभी न पूरा होने वाला ख्वाब दिखा कर भूखा बनाया गया है . जब तक तुम उस से बाहर नही निकलो गे, कांग्रेस को हजम करने में तुम्हे दिक्कत होगी . कांग्रेस तुम्हे , तुम्हारे हाथ में फावड़ा देगी और कहेगी 'रचना ' में लग जाओ , कांग्रेस तुम्हे जाजिम देगी ,इस पर बैठ कर फैसला करो तुम खुद मुख्तार हो .समाज में जहां कहीं भी अन्याय दिखे उसका विरोध करो . डरो मत . तुम कमजोर नही हो
क्यों की तुम अहिंसा के साथ हो . ' न मारेंगे , न मानेगे ' यही तो है सिविल नाफ्र्नानी . बड़ी से बड़ी ताकत झुकी है इस सविनय अवज्ञा पर .कांग्रेस यह सात्विक सबक देगी .लेकिन वो क्या दे रहे हैं ? कभी सोचा है ? उत्तेजक और हिंसक नारे . बीस इकट्ठे हो जाओ तो हमला कर दो किसी भी निरीह पर .आरोप बहुत हैं कुछ भी लगा दो . मसलन यह मांस खाता है . देश द्रोही बोल दो . तुम्हे सिखाया जा रहा है - तुम हो बाकी सब तुम्हारे साथ हैं , जो असहमत हैं वे देश द्रोही हैं . वे तुम्हे यह कभी नही जानने देंगें की हिंसा की उम्र बहुत छोटी होती है . हिंसा की डगर काँटों से भरी होती है . खुबसूरत तो होगी ही नही . चलो अहिंसा को देखो , ध्रुव , प्रहलाद , बुद्ध , और गांधी .सब एक बात कहते हैं एक डगर दिखाते हैं . अप्प दीपो भव , अपना प्रकाश
खुद बनो . आजादी  की जंग कैसे लड़ी गयी , इसमें सिविल नाफ़रमानी का हथियार कैसे चला और जीता उसकी कुछ बानगी देखो / हम आपको ले चलते हैं . आपके पुरखों की जिन्दगी के पास . आँख बंद कर के आकृति बनाओ . आज से सौ साल पहले यानी १९१७ में एक अधनंगा फकीर ( बापू के लिए यह नाम ब्रिटेन के प्रधान मंत्री चर्चिल ने दिया था , ) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में आता है . और कांग्रेस का रुख बदल देता है . पहला आन्दोलन
  चम्पारण
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बिहार में एक जिला है चम्पारण . वहा के किसानो से अंग्रेज सरकार  नील की खेती जबरन कराती थी .जितनी जमीन है उसका तीसरा भाग नील की खेती के लिए आरक्षित रखा रहता था . ऐसा न करने पर किसानो को तरह तरह से प्रताड़ित किया जाता था . एक गरीब किसान राज कुमार शुक्ला गांधी जी से मिले और उन्हें चम्पारण चलने के लिए राजी कर लिए . गांधी जी चम्पारण  पहुच रहे हैं इसकी खबर उस इलाके में आगकी तरह फ़ैल गयी  और स्टेशन पर अपार भीड़ जुटी . अंग्रेज सरकार ने गांधी जी से कहा आप तुरत वापस जाइए . गांधी जी कहा - हम भारत के नागरिक हैं हमे कहीं भी घुमने की आजादी है . पुलिस ने गांधी जी को गिरफ्तार कर लिया . यह खबर पुरे देश में फ़ैल गयी . नतीजा हुआ की बेतिया अदालत जहां गांधी को पेश होना था लाखों की भीड़ ने अदालत को घेर लिया . याद रखिये भारत की आजादी का यह ' टर्निंग प्वाइंट ' माना जाता है जब पहली बार गांधी जी अपना बचाव नही करते बल्कि अंग्रेजी कानून को ही चुनौती देते हैं तुम्हारा कानून ही गलत है . जज ने कहा - सौ रूपये के मुचलके पर रिहा किया जाता है . गांधी जी ने सौ रुपया भी देने से मना कर दिया विवस होकर जज को गांधी जी को छोड़ना पडा . इस तरह चम्पारण का किसान जीता ही नही उसके हाथ में एक निहायत ही खतनाक हथियार मिल गया जालिम से लड़ने के लिए , वह है - सिविल नाफरमानी / आगे चल कर इस सिविल नाफ़रमानी को इस तरह परिभाषित किया - जालिम का कहा , न मानना ही सिविल नाफरमानी है .यदा रखना यही है ' न मारेंगे , न मानेगे ' आज तक यह अहिंसक हथियार आपके पास है बाद बाकी आप जाने .

Sunday, October 8, 2017

काशी विश्व विद्यालय ; जीत गयी छात्राएं
चंचल

     देश नही, दुनिया का सबसे बड़ा आवासीय विश्वविद्यालय है . परिसर में तकरीबन डेढ़ लाख की आबादी एक साथ रहती है / दिलचस्प बात यह है की जिसके लिए यह संस्थान बना
वह है विद्यार्थी और उसकी तादात सबसे कम है . यहाँ बमुश्किल से कुल बीस हजार छात्र होंगे बाद बाकी कर्मचारी और अध्यापक हैं . कुलपति इस संस्थान ' केयर टेकर ' होता है .जो इस परिवार को जनतांत्रिक तरीके से चलाता है और मुख्यतया शिक्षण और प्रशिक्षण गतिविधिया .लेकिन यहाँ जो भी कुलपति आता ही , यहाँ की सुविधाये, साधन , और रुआब का खाका देख कर उस चका चौंध का शिकार हो जाता है और तानाशाह की तरह व्यवहार करने लगता है . इसके इस तानाशाही स्वरुप को और भी खुला मैदान मिलता है जब छात्र संघ कमजोर हो या हो ही नही . इस समय काशी विश्व विद्यालय जो चर्चा में आया उसके पीछे यही कुलपति की ताना शाही खेल ही रहा है . ऐसा नही की य्ह्पहले कुलपति हैं जन्होने अपनी मर्जी से विश्वविद्यालय का संचालन किया , इसके पहले भी इससे ज्यादा मजबूत और 'ताकतवर ' कुलपति आये और जम कर हुकुमत करके गये लेकिन उनके उपर इस तरह के आरोप नही लगे जी इस कुलपति पर लग रहे हैं . यह कुलपति संघ का कार्यकर्ता है , यह घोषणा खुद कुलपति ने किया है . केंद्र में और राज्य में भी संघ की सरकार है .जाहिर है की कुलपति कोम्न्मानी करने की खुली छुट  मिल  गयी .. अब यहाँ से कुलपति ने ओ काम शुरू किये .एक - संघ के उसूल को लादना शुरूकिया .और दुसरा धन की उसूली .संघिकार्यक्र्म की गतिविधियों को विश्वविद्यालय द्वारा संचालित करने लगा . संघी व्याख्यान . सेमीनार , व अन्य कार्य क्रम विश्वविद्यालय के  स्थायी कार्यक्रम बन गये .इसमें राजनीति विभाग के अध्यक्ष को साथ जोड़ा जो की खुद संघ का घोषित कार्यकर्ता रहा . अगर विश्वविद्यालय के तीन सालों की जांच हो और कार्यक्रमों पर आनेवाले खर्च और उसमे भागीदारों के नाम उजागर हों तो सब एक मस्ट संघी निकले गें .
  दुसरा - इस मौजूदा कुलपति गिरीश चन्द्र कुलपति बनते ही सबसे पहले पूर्व कलपती  द्वारा नियुक्त लोंगों को दिक्कत में डालना शुरू कर दिया यहाँ तक की उनके नियुक्तियों को भी अवैध करके उन्हें निकालने का एक तरफा फैसला कर लिया .और फिर नई नियुक्तियों में मनमानी पैसा लेता रहा कुल तीन सौ के उपर हुयी नियुक्तियों पर शक की सुई लटकी पडी है .और यह जांच के दायरे में है .दिल चस्प बात है की नियुक्ति कमिटी और इक्ज्क्युतिव कमेटी दोनों का सदर कुलपति ही होता है . इसने वहाँ भिम्न्मानी की है और इसतरह से की एक बलात्कार का आरोपी नही बल्कि सजायाफ्ता डाक्टर ओ पी उपाध्याय को हास्पिटल का स्थायी अधीक्षिक नियुक्त कर दिया . विश्व विद्यालय में इन दोनों बातों कोलेकर चिंगारी सुलगती रही . इसी बीच कुलपति ने छात्र्राओं के अधिकारों का अतिक्रमण कर के लिंग के आधार पर बाँट कर पीछे धकेल दिया . कुलपति का आदेश निकला पहले ड्रेस कोड - लडकियां क्या पहने , क्या न पहने , फिर दुसरा कानून आया - छात्राएं निरामिष भोजन ही खा सकती हैं . तीसरा कानून आया - कर्फ्यू टाइम . ८ बजे के पहले हर हाल में छात्र्राओं को छात्रावास में अपने आपको बंद कर लेना पडेगा . रात में मोबाइल सुविधा से लडकियां वंचित कर दी गईं .शाम से केन्द्रीय पुस्तकालय में छात्र्राओं को जाने पर रोक्ल्गा दी गयी .यह सब सुलगता रहा . अचानक एक विस्फोट हो ही गया .
        २० सितम्बर को फाइन आर्ट्स कालेज की एक लड़की को कई अवांछनीय सोह्दों ने  छेड़ा , और जब लड़की ने नजदीक ही बैठे प्राक्तोरिय्ल बोर्ड के लोंगो से शिकायत किया तो उधर से जवाब मिला - इतनी देर सर क्यों वापस जा रही हो , चुपचाप हास्टल जाओ की रेप होने तक यहीं रुकी रहोगी . यह वारदात महिला छात्रावास में आग की तरह फैली और लडकिया प्रदर्शन करने लगी . मुख्य द्वार बंद हो गया . हजारों छात्र्राओं ने अद्भुत एकता का परिचय दिया और बिलकुल अहिंसक तरीके से .दुसरे दिन उसी रास्ते से प्रधानमन्त्री को जाना था .यह संयोग ही था की इसी बीच प्रधान मंत्री का काशी आगमन हो गया . यदि मोदी जी कार्यक्रम न बदलते और छात्र्राओं को सुरक्षा मिलेगी , का आशास्वान भर दे देते तो सब वहीँ  शांत हो जाता लेकिन ऐसा नही हुआ और नतीजा यह निकला की जिला प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रशासन ने सामूहिक रूप से यह नतीजा निकाल लिया की मोदी जी ने छात्र्राओं से निपटने के लिए खुली छुट दे दी है .फिर तोजो नंगा नाच शुरू हुआ वह शायद ही किसी सभ्य देश में हुआ होगा . छात्रा वास का गेट तोड़ कर  पुरुष पुलिस ने महिलाओं को घसीट घसीट कर मारना शुरू किया . दो दिन बाद उत्तर प्रदेश किसरकार हरकत में आयी और पुलिस के इस निकम्मी हरकत पर जांच बैठाया है . विश्वविद्यालय बंद कर दिया गया है लेकिन आग सुलग रही है .

Monday, September 11, 2017

chanchal:  श्रद्धांजली / चंचल११ सितम्बर महादेवी वर्मा  की प...

chanchal:  श्रद्धांजली / चंचल
११ सितम्बर महादेवी वर्मा  की प...
:  श्रद्धांजली / चंचल ११ सितम्बर महादेवी वर्मा  की पुण्यतिथि थी --------------------------------------------  ७८ का वाकया है . हम काशी विश...
 श्रद्धांजली / चंचल
११ सितम्बर महादेवी वर्मा  की पुण्यतिथि थी
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 ७८ का वाकया है . हम काशी विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष थे , हमारे साथ भाई महेंद्र नाथ पांडे महामंत्री थे (इस समय उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हैं ) एक दिन अल सुबह हम
अखबार पढ़ रहे थे .अचानक एक खबर ने चौका दिया , खबर थी मुंशी प्रेमचंद पर एक सेमीनार का आयोजन साहित्य अकादमी ने किया है और यह आयोजन बनारस के एक्पांच सितारा
होटल में है जिसे महादेवीवर्मा जी संबोधित करेंगी .अजीब कशमकश के बीच मन उलझ गया . कहाँ  मुंशी प्रेमचंद , कहाँ उनका गाँव , होरी , घीसू ,पूस की रात , कफन , सद्गति ठाकुर का कुंवा , कहाँ पांच सितारा होटल . महेंद्र नाथ पांडे के लिए एकछोटा सा नोट लिख कर राधे चपरासी को दे दिया किजब पांडे जी आवे उन्हें यह कागद दे देना . और हम दो चार दोस्तों को लेकर होटल की तरफ निकल लिए . होटल के मुख्यद्वार पर हम खड़े होकर महादेवी जी का इन्तजार करने लगे . इतने में एक गाडी रुकी और महादेवीजी नीचे उतरी.प्रणाम नमस्कार हुआ
उन्होंने हमसे पूछा - कार्यक्रम   में चल रहे हो ?
हमने कहा - नही ! हम बुआ का अपहरण करने आये हैं . ( हम लोग महादेवी जी बुआ कहते थे )
जोर से हंसी - हाँ रे , सही किया , बड़ा पाप लगता .भैया ( मुंशी प्रेमचंद को वे भैया बोलती थी ) की आत्मा हमे कभी नही माफ़ करती . महादेवी जी हमारी गाडी में बैठ गयी , बाकी जो साथ गये थे सब नीचे रह गये . महादेवी जी ने पूछा वे बच्चे कैसे आयेंगे ? हमने बताया सब आ रहे हैं , जिस होटल की गाडी से महादेवी जी आयी थी , वह अब उन बच्चों के कब्जे में और वह गाडी पीछे पीछे आ रही थी . जब हम विश्व  विद्यालय पहुंचे तब तक भाई महेंद्र नाथ पांडे ने कला संकाय का प्रेक्षा गृह खुलवा कर लॉस स्पीकरवगैरह का  इंतजाम कर के कहीं दुसरे कार्यक्रम में जा चुके थे .हमने कुलपतिजी कोपुरिकथा सूना कर कहाकि आप आ जाँय , महादेवी जी का स्वागत करके  चले जाइए . महादेवी जी को सुनने के लिए जो भीड़ इकट्ठा हुयी हमे स्थान बदलना पडा . तो मधुवन  के मुक्ताकाश में घास पर महादेवी जी बैठ गयी और वहीँ से मुंशी प्रेमचंद जोजो संस्मरण सुनाये वे मील के पत्थर हैं . एक हिस्सा आप भी सुन लीजिये .
     मुंशी प्रेमचंद और महादेवी वर्मा में, मुह बोले  भाई बहन का रिश्ता था . गर्मियों के दिन थे . एक दिन अचानक मुंशी प्रेमचंद महादेवी से मिलने उनके घर इलाहाबाद पहुँच गये . पहुचने की कोइ पूर्व सुचना महादेवी जी को नही थी . दोपहर को भोजन के बाद महादेवी जी  सोने चली गयी थी तब मुंशीजी पहुंचे .उनके बगीचे में एक माली काम करता दिख गया जिसने मुंशी जीको बताया की महादेवी जी अब तोतीं बजे सो कर उठेंगी . मुंशी प्रेमचंद ने कहा -कोइ बात नही , हम तीन बजे ही मिल लेंगे .पूरी दोपहरी मुंशी जी और वह माली एक दुसरे से बतिआते रहे . मुन्शिजिको उसने गुड खिला कर पानी पिलाया .दोपहर बाद जब महादेवी जी उठी तो  उन्हें हैरानी हुयी . सहजता की शख्सियत थे मुंशी प्रेमचंद .महादेवी जी धारा प्रवाह बोल रही थी , विश्वविद्यालय घेरे खड़ा उन्हें सुनता रहा . दिल्ली से साहित्य अकादमी के साहित्यकार आये थे वे सब होटल की एक बस लेकर महादेवी के इस कार्य क्रम में भाग लिए . इसी आर्य्क्रम ने हमे साहित्य में कई आचे दोस्त भी दिए . विष्णु खरे , गुलशेर खान  शानी , गिरधर राठी वगैरह .
        इससे भी ज्यादा दिलचस्प वाकया यूँ हुआ .
अपने छात्र जीवन में महादेवी वर्मा जी चाहती थी उनकी पढाई  काशी विश्व विद्यालय से हो . उन्होंने प्रवेश फ़ार्म भरा .लेकिन विश्व विद्यालय ने उस फ़ार्म को रिजेक्ट कर दिया सो महादेवी जी दाखिला नही ले पायी .एकदिन वह भी आया जब विश्वविद्यालय का सबसे बड़ा जलसा दीक्षांत समारोह किमुख्य अतिथि बन कर विश्वविद्यालय आयी .
आज भारत का साहित्य समाज अपनी इस  महान रचनाकार महादेवी वर्मा को सादर श्रद्धांजली दे रहा है .
( बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी का हिंदी नाम है काशी विश्व विद्यालय )

chanchal: चिखुरी / चंचलराजनीति - राजनीति = सब कुछ--------...

chanchal: चिखुरी / चंचल

राजनीति - राजनीति = सब कुछ
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: चिखुरी / चंचल राजनीति - राजनीति = सब कुछ -----------------------------------------------------------------------------------------------...
चिखुरी / चंचल

राजनीति - राजनीति = सब कुछ
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राजनीति की सीधी और सरल परिभाषा है - एक सोच जो आख़िरी इंसान तकको बेहतर जीवन दे .ऋग्वेद की एक ऋचा है जानाति इछति अथ करोति .इच्छा , ज्ञान और शक्ति .
कुछ भी करने के लिए ये तीन तत्व जरूरी होते हैं . राजनीति  इन्ही तीन तत्वों से स्थापित होती है . इसमें साध्य अगर पवित्र है तो साधन भी उतने ही पाक साफ़ होने चाहिए .आजादी की लड़ाई में हमने यही रास्ता अख्तियार किया और गांधी जी के नेतृत्व में आजादी हासिल किया .यहाँ एक छोटा सा सवाल उठाया जा सकता है जो अक्सर नही उठाया जाता . जिस समय कांग्रेस अंग्रेजी साम्राज्य से टक्कर ले रही थी एनी दल क्या कर रहे थे ? और कौन  कौन दल सक्रीय रहे . कई संघन ऐसे रहे जिनका मानना था की सत्ता हथियार से बदली जा सकती है .इसमें कई नाम हैं शहीद भगत सिंह , चंद्रशेखर आजाद , सुभाष चन्द्र बोस , वगैरह . दूसरा बड़ा दल था कांग्रेस .जो बापू के सत्य और अहिंसा को सामने  रख कर सिविलनाफ़रमानी के हथियार से अंग्रेजी निजाम को टक्कर दे रहा था . सोवियत रूस के उदय के बाद भारत में साम्यवादी दल भी बन चुके थे लेकिन उनकी नीतियाँ भारतीय न होकर अंतर्राष्ट्रीय रही और वह दल उसी के अनुसार अपनी नीतिया बना रहे थे .उदाहरण के लिए जब ४७ का कांग्रेस ने  अंग्रेजो भारत छोडो का आन्दोलन चलाया तो साम्यवादियों ने न्ग्रेजों का साथ दिया . क्यों की उस समय सोवियत सरकार हिटलर के खिलाफ अंग्रेजों के साथ हो चुका था . १९२५ में बना रास्ट्रीय स्वयं सेवक संघ उससे भी जलील हरकत पर उतर कर अंग्रेजों का साथ दे रहे थे .दिक्कत क्या है की हम इस पीढ़ी को इतिहास नही दे पाए .हमने अनेक रास्तों से नई पीधिको काँवरिया और डी जे तो दे दिए लेकिन उसे यह नही बता पाए कि बाचा खान जिन्हें लोग सरहदी गांधी के नाम से जानते हैं , ने इस मुल्क में लाल कुर्ती नाम से खुदाई खिदमदगार नाम की संस्था बना कर हिन्दू और मुसलमान दोनों का विशवास अर्जित किया .लेकिन आज ?
     सत्ता के मद में चूर सरकारी दल के लोग अपनी आलोचना तक सुनने को तैयार नही हैं . अभी क्ल५ सितम्बर को कर्नाटक की एक जांबाज पत्रकार गौरी लंकेश कोगोलिमार कर हत्या कर दी गयी . हम हिंदी पट्टी के लोग अपने कुंए में बैठ कर देश  दुनिया खबर पर वक्त जाया करेंगे लेकिन अपने पड़ोस की बड़ी घटना सेकत्तई दूर रहते आये हैं .कर्नाटक दक्षिण भारत का प्रसिद्द सूबा है . अब तक यह  साम्प्र्दैक आग की लत से बहुत दूर रहा है लेकिन विगत कुछ वर्षों से यहाँ भी साम्प्रदायिक सौहार्द्य बिगड़ा है .इस सौहार्द्य को बनाये रखने के लिए यहाँ समाजवादी लोहियावादी लोंगो का एक बड़ा जमावड़ा रहा जिसमे केवल राजनीतिक लोग ही नही रहे बल्कि कला और पत्रकारिता के भिलोग रहे हैं .इनमे ग्गिरिश कर्नाड , यु आर अनंत मूर्ति .बी व् कारंत , पी लंकेश , जैसे बहुत नाम हैं . कल जिसकी ह्त्या की गयी वह प्रसिद्द समाजवादी , लेखक , पत्रकार , फिल्म निर्माता पी लंकेश की बेटी गौरी लंकेश है .गौरी का गुनाह इतना भर रहा की वह हिन्दू साम्प्रदायिकता और उसकी हिंसक राजनीति की खुली मुखालफत करती रही . आज पत्रकारिता के इतिहास का का यह काला दिन है जब एक पत्रकार को उसे मौत के घात इस लिए उतार दिया गया कईं की उसकी जुबान में ताकत थी . सच बोलने का जज्बा था . पत्रकारिता की दुनिया में लंकेश पत्रिका बगैर किसी विज्ञापन के छपती रही .अपने आखिरी सम्पादकीय में गौरी ने संघ के अफवाह उड़ाने की कला पर विस्तार से लिखा था . गणेश चतुर्दशी के अवसर पर संघ ने पूरे कर्नाटक में वशिला माहौल बनाया लेकिन उसे सरकार ने उघार कर दिया .
       अब वक्त है किलोग सही रास्ते को चुने और अपनी बेहतरीन दुनिया बनाएं
गौरी लमेश का बलिदान अकारथ नही जायगा .
सादर श्रद्धांजली गौरी लंकेश को .

Monday, August 28, 2017

chanchal: chanchal: चिखुरी चिचिआने / चंचलजब पाखण्ड के आतंक स...चिखुरी चिचियाने / चंचल अंदर बलात्कार होता रहा ,हम राम धुन गाते रहे ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ हम दुनिया के सामने , तीसरी बार नंगा हो रहे हैं . ३० जनवरी १९४८ , जब हमने एक निहत्थे फ़कीर को सरे आम उस समय गोली मार कर ह्त्या कट दी , जब वह राम धुन के साथ लोंगो को सद्भाव से रहने की अपील करने जा रहा था . किस जाहिल सोच ने गोली चलाई थी ? जवाब सब को मालूम है , सारी दुनिया जानती है वह छद्म 'हिन्दू ' सोच . गौर करिए उस अंग्रेज महिला के जवाब को जो उसने एक भातरीय को दिया था . भारतीय नौजवान अपने देश की तारीफ़ में बोल रहा था- हम कितने महान हैं जिस धरती पर बुद्ध और गांधी पौदा हुए हैं . अंग्रेज महिला ने पलटकर पूछा था - इसीलिये तुम महान हो किएक निहत्थे फ़कीर को गोलियों से छलनी कर डाले ? इसका जवाब हम आज तक नही दे पाए हैं . हमे सारी दुनिया के सामने किस सोच ने शर्मिंदा होने को मजबूर किया है ? यह सवाल जब तक नही दे पाओगे , तब तक मेहरबानी करके राष्ट्रप्रेम की बात मत करो लोग तुम पर हँसेंगे . बापू की ह्त्या पर वायसराय की टिप्पणी थी - अगर यह महात्मा गुलाम भारत में मरता तो अंग्रेज अपने उपर लगे कलंक को कभी नही मिटा पाते .एक अन्ग्रेज्की सोच थी और एक ये हिन्दू की सोच ? दूसरी बार हम शर्मिन्दा हुए ६ दिसम्बर १९९२ को जब अयोध्या में बारी मस्जिद गिरा दी गयी .अब तक हम सारी दुनिया में दो बातों के लिए इज्जत पाते थे , एक -हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और दुसरा सबसे बड़ा तर्क की हम दुनिया में सबसे बड़े सद्भावी देश हैं हना हे एक को अपने अपने मजहब में में जीने की खुली आजादी है .६ दिसम्बर ९२ कोक्या हुआ ? एक धर्म की आड़ में कुल डेढ़ लाख की भीड़ अयोध्या में जुटी और उसने दुसरे धर्म के इबादत गाह पर हमला करके उसे ध्वस्त कर दिया .और दुनिया में यह दर्ज हो गया की भारत एक धर्म विशेष का मुल्क है जहां एनी धर्मों को सलीके से जीने की सुविधा नही है . हम इर शर्मिन्दा हुए और किस सोच ने हमे शर्मिन्दा किया ? अगली नस्ल इसका जवाब खोजेगी लेकिन कमबख्त यह पीढ़ी तो नाकारा साबित ही हुयी , किसने हमे सोच के आधार पर बधिया किया है ? तीसरी बार पंचकुला ने हमे लबे सडक नंगा कर दिया और हम बेबस होकर इधर उधर झाँक रहे हैं . बलात्कार एक बीमारी है कुछ शीत देशों को छोड़ दिया जाय तो यह बीमारी कमोबेश हर मुल्क में है , हर मुल्क के पास इसका इलाज भी है , बीमार को सजा मिलती है बगैर किसी भेद भाव के . रंग . नस्ल. धन. वोह्दा , रूतबा नके यहाँ कोइ मायने नही रखता , न्याय सब केलिए बराबर है . लेकिन कल पंचकुला की घटना ने हमे नये सिरे से शर्मिन्दा किया है . जब शबे की सरकार और खुद केंद्र की सरकार चाँद वोटो केलिए अपने जमीर का ही सौदा कर ले , यह कल उघार हो गया जब बलात्कार का अपराधी जगमीत न्यायालय में अप्राधिघोषित हुआ तो पहली बार जगमीत राम र हीम को लगा की कल तक हम जिन अबोध भोली भाली जनता को छल कर उसे लूट रहे थे , उसका तन, मन और धन आज वो खुद लुट गया है ,जिसने उससे वायदा किया था . इन अपराधों से मुक्त कराने के लिए वे खुद जनता की अदालत में अपराधी बने खड़े हैं .कल हरियाणा और केंद्र का नेतृत्व बिलकुल नंगा हो गया जब जगमीत की बेटी ने खुले आम यह रहस्य खोल दिया की भाजपा और पापा से जो डील हुआ था की तुम हमे वोट दो हम तुम्हे बलात्कार समेत जितने भी जुर्म हैं उनसे बरी करा देंगे .यह दुनिया की पहली बदचलन सरकार है जो काठ की कुर्सी के लिए तमाम जरायम पेशे को अख्तियार किये बैठी है और एक धर्म की आड़ में दुहाई देगी हिन्दू होने की . हिन्दू सभ्यता का सबसे बड़ा कातिल अगर कोइ है तो वो ये ही हैं . अभी और लिखते लेकिन चिखुरी उठ गये , मद्दू पत्रकार एक नई खबर लाये है . आश्रम में दोलाख की एक गाडी अभी जला दी गयी है

chanchal: chanchal: चिखुरी चिचिआने / चंचलजब पाखण्ड के आतंक स...: chanchal: चिखुरी चिचिआने / चंचल जब पाखण्ड के आतंक से समाज न ... : चिखुरी चिचिआने / चंचल जब पाखण्ड के आतंक से समाज न  जूझ पाए ------------...चिखुरी चिचियाने / चंचल

 अंदर बलात्कार होता रहा ,हम राम धुन गाते रहे

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हम दुनिया के सामने , तीसरी बार नंगा हो रहे हैं .

३० जनवरी १९४८ , जब हमने एक निहत्थे फ़कीर को सरे आम उस समय गोली मार कर  ह्त्या कट दी , जब वह राम धुन के साथ लोंगो को सद्भाव से रहने की अपील करने जा रहा था .

किस जाहिल सोच ने गोली चलाई थी ?

जवाब सब को मालूम है , सारी दुनिया जानती है वह छद्म 'हिन्दू ' सोच . गौर करिए उस अंग्रेज महिला के जवाब को जो उसने एक भातरीय को दिया था . भारतीय नौजवान अपने देश की तारीफ़ में बोल रहा था- हम कितने महान हैं जिस धरती पर बुद्ध और गांधी  पौदा हुए हैं . अंग्रेज महिला ने पलटकर पूछा था - इसीलिये तुम महान हो किएक निहत्थे फ़कीर को गोलियों से छलनी कर डाले ? इसका जवाब हम आज तक नही दे पाए हैं . हमे सारी दुनिया के सामने किस सोच ने शर्मिंदा होने को मजबूर किया है ? यह सवाल जब तक नही दे पाओगे , तब तक मेहरबानी करके राष्ट्रप्रेम की बात मत करो लोग तुम पर हँसेंगे . बापू की ह्त्या पर वायसराय की टिप्पणी थी - अगर यह महात्मा गुलाम भारत में मरता तो अंग्रेज अपने उपर लगे कलंक को कभी नही मिटा पाते .एक अन्ग्रेज्की सोच थी और एक ये हिन्दू की सोच ?

दूसरी बार हम शर्मिन्दा हुए ६ दिसम्बर १९९२ को जब अयोध्या में बारी मस्जिद गिरा दी गयी .अब तक हम सारी  दुनिया में दो बातों के लिए इज्जत पाते थे , एक -हम दुनिया के सबसे बड़े

लोकतंत्र हैं और दुसरा सबसे बड़ा तर्क की हम दुनिया में सबसे बड़े सद्भावी देश हैं हना हे एक को अपने अपने मजहब में में जीने की खुली आजादी है .६ दिसम्बर ९२ कोक्या हुआ ? एक धर्म की आड़ में कुल डेढ़ लाख की भीड़ अयोध्या में जुटी और उसने दुसरे धर्म के इबादत गाह पर हमला करके उसे ध्वस्त कर दिया .और दुनिया में यह दर्ज हो गया की भारत एक धर्म विशेष का मुल्क है जहां एनी धर्मों को सलीके से जीने की सुविधा नही है . हम इर शर्मिन्दा हुए और किस सोच ने हमे शर्मिन्दा किया ? अगली नस्ल इसका जवाब खोजेगी लेकिन कमबख्त यह पीढ़ी तो नाकारा साबित ही हुयी , किसने हमे सोच के आधार पर बधिया किया है ?

तीसरी बार पंचकुला ने हमे लबे सडक नंगा कर दिया और हम बेबस होकर इधर उधर झाँक रहे हैं . बलात्कार एक बीमारी है कुछ शीत देशों को छोड़ दिया जाय तो यह बीमारी कमोबेश हर मुल्क में है , हर मुल्क के पास इसका इलाज भी है , बीमार को सजा मिलती है बगैर किसी भेद भाव के . रंग . नस्ल. धन. वोह्दा , रूतबा नके यहाँ कोइ मायने नही रखता , न्याय सब केलिए बराबर है . लेकिन कल पंचकुला की घटना ने हमे नये सिरे से शर्मिन्दा किया है . जब शबे की सरकार और खुद केंद्र की सरकार चाँद वोटो केलिए अपने जमीर का ही सौदा कर ले , यह कल उघार हो गया जब बलात्कार का अपराधी जगमीत न्यायालय में अप्राधिघोषित हुआ तो पहली बार जगमीत राम र हीम को लगा की कल तक हम जिन अबोध भोली भाली जनता को छल कर उसे लूट रहे थे , उसका तन, मन और धन आज वो खुद लुट गया है ,जिसने उससे वायदा किया था . इन अपराधों से मुक्त कराने के लिए वे खुद जनता की अदालत में अपराधी बने खड़े हैं .कल हरियाणा और केंद्र का नेतृत्व बिलकुल नंगा हो गया जब जगमीत की बेटी ने खुले आम यह रहस्य खोल दिया की भाजपा और पापा से जो डील हुआ था की तुम हमे वोट दो हम तुम्हे बलात्कार समेत जितने भी जुर्म हैं उनसे बरी करा देंगे .यह दुनिया की पहली बदचलन सरकार है जो काठ की कुर्सी के लिए तमाम जरायम पेशे को अख्तियार किये बैठी है और एक धर्म की आड़ में दुहाई देगी हिन्दू होने की .

हिन्दू सभ्यता का सबसे बड़ा कातिल अगर कोइ है तो वो ये ही हैं .

अभी और लिखते लेकिन चिखुरी उठ गये , मद्दू पत्रकार एक नई खबर लाये है . आश्रम में दोलाख की एक गाडी अभी जला दी गयी है


चिखुरी चिचियाने / चंचल
 अंदर बलात्कार होता रहा ,हम राम धुन गाते रहे
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हम दुनिया के सामने , तीसरी बार नंगा हो रहे हैं .
३० जनवरी १९४८ , जब हमने एक निहत्थे फ़कीर को सरे आम उस समय गोली मार कर  ह्त्या कट दी , जब वह राम धुन के साथ लोंगो को सद्भाव से रहने की अपील करने जा रहा था .
किस जाहिल सोच ने गोली चलाई थी ?
जवाब सब को मालूम है , सारी दुनिया जानती है वह छद्म 'हिन्दू ' सोच . गौर करिए उस अंग्रेज महिला के जवाब को जो उसने एक भातरीय को दिया था . भारतीय नौजवान अपने देश की तारीफ़ में बोल रहा था- हम कितने महान हैं जिस धरती पर बुद्ध और गांधी  पौदा हुए हैं . अंग्रेज महिला ने पलटकर पूछा था - इसीलिये तुम महान हो किएक निहत्थे फ़कीर को गोलियों से छलनी कर डाले ? इसका जवाब हम आज तक नही दे पाए हैं . हमे सारी दुनिया के सामने किस सोच ने शर्मिंदा होने को मजबूर किया है ? यह सवाल जब तक नही दे पाओगे , तब तक मेहरबानी करके राष्ट्रप्रेम की बात मत करो लोग तुम पर हँसेंगे . बापू की ह्त्या पर वायसराय की टिप्पणी थी - अगर यह महात्मा गुलाम भारत में मरता तो अंग्रेज अपने उपर लगे कलंक को कभी नही मिटा पाते .एक अन्ग्रेज्की सोच थी और एक ये हिन्दू की सोच ?
दूसरी बार हम शर्मिन्दा हुए ६ दिसम्बर १९९२ को जब अयोध्या में बारी मस्जिद गिरा दी गयी .अब तक हम सारी  दुनिया में दो बातों के लिए इज्जत पाते थे , एक -हम दुनिया के सबसे बड़े
लोकतंत्र हैं और दुसरा सबसे बड़ा तर्क की हम दुनिया में सबसे बड़े सद्भावी देश हैं हना हे एक को अपने अपने मजहब में में जीने की खुली आजादी है .६ दिसम्बर ९२ कोक्या हुआ ? एक धर्म की आड़ में कुल डेढ़ लाख की भीड़ अयोध्या में जुटी और उसने दुसरे धर्म के इबादत गाह पर हमला करके उसे ध्वस्त कर दिया .और दुनिया में यह दर्ज हो गया की भारत एक धर्म विशेष का मुल्क है जहां एनी धर्मों को सलीके से जीने की सुविधा नही है . हम इर शर्मिन्दा हुए और किस सोच ने हमे शर्मिन्दा किया ? अगली नस्ल इसका जवाब खोजेगी लेकिन कमबख्त यह पीढ़ी तो नाकारा साबित ही हुयी , किसने हमे सोच के आधार पर बधिया किया है ?
तीसरी बार पंचकुला ने हमे लबे सडक नंगा कर दिया और हम बेबस होकर इधर उधर झाँक रहे हैं . बलात्कार एक बीमारी है कुछ शीत देशों को छोड़ दिया जाय तो यह बीमारी कमोबेश हर मुल्क में है , हर मुल्क के पास इसका इलाज भी है , बीमार को सजा मिलती है बगैर किसी भेद भाव के . रंग . नस्ल. धन. वोह्दा , रूतबा नके यहाँ कोइ मायने नही रखता , न्याय सब केलिए बराबर है . लेकिन कल पंचकुला की घटना ने हमे नये सिरे से शर्मिन्दा किया है . जब शबे की सरकार और खुद केंद्र की सरकार चाँद वोटो केलिए अपने जमीर का ही सौदा कर ले , यह कल उघार हो गया जब बलात्कार का अपराधी जगमीत न्यायालय में अप्राधिघोषित हुआ तो पहली बार जगमीत राम र हीम को लगा की कल तक हम जिन अबोध भोली भाली जनता को छल कर उसे लूट रहे थे , उसका तन, मन और धन आज वो खुद लुट गया है ,जिसने उससे वायदा किया था . इन अपराधों से मुक्त कराने के लिए वे खुद जनता की अदालत में अपराधी बने खड़े हैं .कल हरियाणा और केंद्र का नेतृत्व बिलकुल नंगा हो गया जब जगमीत की बेटी ने खुले आम यह रहस्य खोल दिया की भाजपा और पापा से जो डील हुआ था की तुम हमे वोट दो हम तुम्हे बलात्कार समेत जितने भी जुर्म हैं उनसे बरी करा देंगे .यह दुनिया की पहली बदचलन सरकार है जो काठ की कुर्सी के लिए तमाम जरायम पेशे को अख्तियार किये बैठी है और एक धर्म की आड़ में दुहाई देगी हिन्दू होने की .
हिन्दू सभ्यता का सबसे बड़ा कातिल अगर कोइ है तो वो ये ही हैं .
अभी और लिखते लेकिन चिखुरी उठ गये , मद्दू पत्रकार एक नई खबर लाये है . आश्रम में दोलाख की एक गाडी अभी जला दी गयी है

Monday, August 21, 2017

chanchal: चिखुरी चिचिआने / चंचलजब पाखण्ड के आतंक से समाज न ...

chanchal: चिखुरी चिचिआने / चंचल
जब पाखण्ड के आतंक से समाज न ...
: चिखुरी चिचिआने / चंचल जब पाखण्ड के आतंक से समाज न  जूझ पाए ------------------------------------------------------------------------------...
चिखुरी चिचिआने / चंचल
जब पाखण्ड के आतंक से समाज न  जूझ पाए
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   नवल उपधिया का कहना है ,- नाला पार पसिआने में दो औरतों का बाल काट दिया बा , और उ दोनों बेहोश अस्पताल में पडी हैं .
बार कटवा . पूर्वी उत्तर प्रदेश से  बढ़ते बढ़ते  पश्चिम की तरफ जा रहा है .जाहिर है उसी अनुपात में नमक मिर्च भी बढेगा . समाज में दहशत है . कयूम मिया के पास गंभीर इलाज है
' औरतें गर बाल छिलवा लें तो जान रहें कहें मगर यह तांता ही ख़त्म समझो . न रहेगा बांस , न बजेगी बासुरी .लखन कहार ने पूछा - तो जे केवल औरतों का ही कट  रहा है , मर्दों का नही ?
उमर दरजी ने टुकडा जोड़ा - जेकरा रही , उही का कटी न / कि लाल साहेब क कटी जे बर बख्त सफाचट रहते हैं . कोलई दुबे नई कहानी के साथ पेश हुए . पाकिस्तान की तरफ से अंग्रेजी
प्लास्टिक क काला भंवरा छोड़ा गया है और वह रात में उड़ता है औरतों को तलाश कर उन पर हमला करता है , छेदी बो ने अपनी आँखन देखी बताय रही हैं तमाम भीड़ जुटी है .गिरी ओझा
झाड फूंक में लग गये हैं . केसरिया कपड़ा से तन धको , कोइ असर नही होगा . कीन उपधिया ने तस्दीक किया - बात तो बिलकुल सही है . जन्तर मंतर में बहुत बल होता है रंग का बहुत असर होता है . उस दिन नही देखा अब अस्पताल के बिस्तर भी भगवा रंग में होंगे .गोरखपुर अस्पताल की नई सजावट नही देखा ? कीन की बात को नवल ने बीच में ही रोक दिया - गेरुआ रंग देख के कीड़ा मकोड़ा चूहा मच्छर सब भाग जाते हैं अब देखो अब तो जो बुलेट ट्रेन आय रही हैं उसके अंदर की रंगाई पोताई भी केसरिया रंग में है . जा रे जमाना ! कितना आसान इलाज्खोज निकाला इस सरकार ने .
बहुत देर तक चुप बैठे भिखई मास्टर ने एक छोटा सा सवाल पूछा -येसी वारदातें इसी मुल्क में होती हैं या दुसरे मुल्कों में भी ऐसा होता है ?
सवाल कठिन था , जाहिर है चुप्पी का फैलना .क्यों की इनमे से कोइ भी इस मुल्क के बाहर जाने की सोच भी नहीं सकता न ही उस तरह की पढाई लिखाई की है .सवाल का एक छोर
मद्दु पत्रकार ने कीन उपधिया की और उछाला - कीन बता सकते हैं विदेश के बारे में , काहे से की आज ये सरकारी पार्टी के गहरे सदस्य हैं और हर तीन घंटे बाद इनका प्रधान मंत्री
विदेश चला जाता है . सो विदेश की जानकारी कींन  को ज्यादा है . कीनसंजीदा हो गये . खैनी मले , सुरती ठोंके फिर मुह खोले - दुनिया में बहुत कम देश ऐसे हैं जहां ये सब अनोखी चीजें
मिलती हों हमारे प्रधानमंत्री जी यही तो बोलते हैं की दुनिया में सबसे कमाल के देश हैं . अचानक चिखुरी चीखे - चोप्प ! तब से बक बक किये जा रहा है , ससुरो तुमलोगों ने देश को कबाड़ा
बना कर छोड़ दिया है . रोयेंगी आने वाली नस्लें . गणेश को  दूध पिलाओ .अत्तर के हनुमान , गणेश सब दूध पीने लगे . भागे रे मुहनोच्वा आवा बा . अकेले जौनपुर में सौ के उपर लोग मारे गये तुम्हारी नालायकी के चलते . कितने विक्षिप्त , पागल , गजेडी . भिखमंगे मुह नोच्वा इ नाम पर मारे गये . नेवादा में रात में ट्रेन रुकी एक फौजी नीचे उतरा शराब के नशे में था . लोगों ने घेर कर मार डाला , मुकदमा आज तक चल रहा है . गलती जनता की नही थी . प्रतिनिधि था , सांसद था , बेदान्ती . घूम घूम कर भाषण दिया है मोह नोचावा के बारे में . अफवाहों के उस्ताद हो , अभी तुम्हारा एक जिम्मेदार नेता बोल रहा है मन्त्र से चीन की सेना को भगा देंगे . यही तो सोमनाथ मंदिर में किया था , मूढ़ता का तुम्हारा पुराना इतिहास है .विदेशी  लुटेरे  आ रहे हैं
साधू सन्यासी मन्त्र पढ़ रहे हैं . मन्त्र मार देगा लुटेरों  को . नतीजा अन्दिर ही नही लुटा , समूचा देश लुट गया . हम गुलामी की नीव डाल बैठे . आज फिर उसी और मुल्क को ले जा रहे हो . इसे रोकना पडेगा . वैज्ञानिक सोच की बुनियाद पर पंडित नेहरु ने जिस समाज की संरचना की शुरुआत की है अगर उसे हमने छोड़ा तो हम कहीं के नहीं रहेंगे .
       पढ़े लिखे लोंगों की जिम्मेवारी  है की वे इस तरह के दकियानूसी अफवाहों से समाज को मुक्त करें .
'सटीक ' कह कर नवल ने साइकिल उठा लिया -
  मिर्जापुर कैल गुलजार हो . कचौड़ी गली सून कैल बलमू